व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कंप्यूटरीकृत और केंद्रीकृत पद्धति से परीक्षा कराने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य है। इस पद्धति को केंद्र सरकार ने भी स्वीकार किया है। यह पूरी तरह से पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त है। एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को यह बात कही।
'अफवाहों पर भरोसा न करें'
महाराष्ट्र राज्य सामान्य प्रवेश परीक्षा (एमएचटी-सीईटी) के आयुक्त दिलीप सरदेसाई ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों को अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। सभी आपत्तियों का समाधान कर दिया गया है।
कब आयोजित की गई थीं परीक्षाएं
उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग, फार्मेसी और कृषि पाठ्यक्रमों के लिए एमएचटी-सीईटी-2024 प्रवेश परीक्षा 22 से 30 अप्रैल (पीसीबी समूह) और 2 से 16 मई (पीसीएम) समूह के बीच आयोजित की गई थी। परीक्षा 169 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। पीसीबी समूह की परीक्षा 12 सत्रों में आयोजित की गई थी। जबकी पीसीएम समूह की परीक्षा 18 सत्रों में आयोजित की गई थी।
परीक्षा के लिए पहुंचे 6,75,377 छात्र
सरदेसाई ने बताया कि कुल 3,30,988 छात्रों, 3,94,033 छात्राओं और 31 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों ने एक ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अपना नाम पंजीकृत कराया। जिनमें से 6,75,377 प्रवेश परीक्षा के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि गलत उत्तरों के लिए नकारात्मक अंक की प्रणाली नहीं थी। नतीजे प्रतिशत की पद्धति का इस्तेमाल करते हुए घोषित किए गए थे। किसी भी उम्मीदवार को ग्रेस अंक नहीं मिले।
वेबसाइट पर प्रकाशित की गईं संशोधित उत्तर-पुस्तिकाएं
अधिकारी ने आगे कहा, "अगर अभ्यर्थी या उनके माता-पिता को सवाल या जवाब के बारे में कोई आपत्ति थी, तो सीईटी सेल ने उन्हें अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए एक ऑनलाइन सुविधा प्रदान की। इन आपत्तियों को संबंधित विषय के विशेषज्ञों द्वारा सत्यापित किया गया था और फिर उत्तर-पुस्तिकाओं को संशोधित किया गया था। संशोधित उत्तर-पुस्तिकाओं की रिपोर्ट सीईटी सेल की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी।"
उन्होंने कहा, विषय के विशेषज्ञों के सुझाव के मुताबिक संशोधित उत्तर पुस्तिकाओं को शामिल करने के बाद ही नतीजे की प्रक्रिया शुरू की गई थी। सरदेसाई ने कहा कि अभ्यर्थियों द्वारा प्राप्त अंकों को नतीजे की प्रक्रिया के फॉर्मूले के अनुसार ही घोषित किया गया था। सत्रवार नतीजे प्रतिशत के रूप में घोषित किए गए थे।