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MHA: किसान संघर्ष में हरियाणा सरकार ने की 3 IPS-3 HPS को वीरता पदक की सिफारिश, CRPF से किसी का नाम नहीं

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 24 Jul 2024 02:18 PM IST

सार

गृह मंत्रालय ने उक्त अफसरों की असाधारण वीरता वाली फाइल को यह कहते हुए वापस लौटाया है, यह देखा गया है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कर्मियों ने भी उक्त कार्रवाई में भाग लिया था।
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किसान संघर्ष में हरियाणा सरकार ने की 3 IPS-3 HPS को वीरता पदक की सिफारिश - फोटो : Amar Ujala
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की स्पेशल यूनिट 'रैपिड एक्शन फोर्स', जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा/दंगे से निपटते हुए देखा जा सकता है। गत फरवरी में हरियाणा-पंजाब के शंभू व खनौरी बॉर्डर पर किसानों के साथ पुलिस का जो संघर्ष हुआ था, उसमें हरियाणा सरकार ने अपने तीन आईपीएस और तीन एचपीएस अधिकारियों को वीरता पदक देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश कर दी। हालांकि, उसकी लिस्ट में आरएएफ का नाम नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि शंभू बॉर्डर पर संघर्ष के दौरान सीआरपीएफ/आरएएफ की 106वीं बटालियन के जवानों/अफसरों ने भी बहादुरी का परिचय दिया था। आरएएफ ने उन लोगों की भीड़ को आगे बढ़ने से रोक दिया था, जिनके हाथों में भाले व तलवार सहित कई तरह की हानिकारक सामग्री थी। हालांकि,  सीआरपीएफ मुख्यालय ने आरएएफ के उस दस्ते को किसी तरह का कोई अवॉर्ड नहीं दिया। बल ने इस संबंध में कोई सिफारिश नहीं की। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार की वह फाइल वापस लौटा दी है, जिसमें पुलिस अफसरों को वीरता पदक देने की सिफारिश की गई है। यह भी कहा है कि इस फाइल में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की भूमिका का उल्लेख किया जाए। संयुक्त ऑपरेशन में उनके असाधारण साहस का जिक्र हो।

तलवार व भालों से लैस थे प्रदर्शनकारी … 
बता दें कि फरवरी के दौरान शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर किसानों द्वारा अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया जा रहा था। किसान संगठन, दिल्ली कूच करना चाहते थे, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। इसके चलते पहले शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ। उसमें दर्जनों लोगों को चोट आई थी। वहां ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मी मारे गए थे। कुछ दिन बाद खनौरी बॉर्डर पर भी पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ था। यहां पर किसान शुभकरण की मौत हो गई थी। शंभू बॉर्डर पर सीआरपीएफ/आरएएफ के दस्ते ने किसानों के साथ हुए संघर्ष में असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया था। यह बात संघर्ष के कई वीडियो और फोटो में भी दिखाई पड़ रही थी। किसानों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने तलवार व भालों से पुलिस पर हमला बोल दिया था। आएरएफ ने जान की परवाह न करते हुए किसानों को आगे नहीं बढ़ने दिया था।


गृह मंत्री कर चुके हैं प्रशंसा … 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सीआरपीएफ की कार्यशैली, वीरता और कर्तव्य परायणता की कई बार सार्वजनिक मंच से प्रशंसा कर चुके हैं। गत वर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित बल के 84वें स्थापना दिवस पर अमित शाह ने कहा था, मैं देश के किसी भी कोने में रहूं, अगर कोई अप्रिय घटना घटती है, लेकिन जैसे पता चलता है कि सीआरपीएफ वहां पहुंच गई है तो मैं निश्चिंत होकर अपने काम में लग जाता हूं। ये सीआरपीएफ के प्रति मेरा विश्वास है। आतंकवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस बल की वीरता किसी से छिपी नहीं है।

इन लोगों को वीरता पदक देने की सिफारिश … 
शंभू व खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने असाधारण साहस दिखाने वाले तीन आईपीएस व तीन एचपीएस अधिकारियों को वीरता पदक देने की सिफारिश कर दी। इनमें पुलिस महानिरीक्षक अंबाला रेंज सिबाश कबिराज, अंबाला के तत्कालीन एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा और जींद के एसपी सुमित कुमार के नाम का प्रस्ताव किया गया। ये सभी आईपीएस अधिकारी हैं। इनके अलावा हरियाणा पुलिस सेवा (एचपीएस) के अधिकारी नरेंद्र सिंह, राम कुमार और अमित भाटिया का नाम भी वीरता पदक की सिफारिश वाली फाइल में शामिल किया गया।

वह एक संयुक्त अभियान था, एमएचए … 
गृह मंत्रालय ने उक्त अफसरों की असाधारण वीरता वाली फाइल को यह कहते हुए वापस लौटाया है, यह देखा गया है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कर्मियों ने भी उक्त कार्रवाई में भाग लिया था। फाइल में इनके नाम की कोई अनुशंसा तक नहीं थी। वह एक संयुक्त अभियान था।
राज्य सरकार को अपने प्रस्ताव में इसका जिक्र करना चाहिए था।

बल के जवान बेहतरीन कार्य करते हैं… 
इस बाबत सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने में  आरएएफ की अहम भूमिका थी। इसके बावजूद बल मुख्यालय द्वारा उक्त बटालियन के दस्ते को डीजी डिस्क नहीं दी गई। न ही किसी दूसरे अवार्ड की सिफारिश की गई। इस संबंध में सूत्रों का कहना है, सीआरपीएफ एक केंद्रीय बल है। हिंसा व दंगे की स्थिति में देश के हर हिस्से से यह मांग आती है कि वहां पर सीआरपीएफ को भेजा जाए। सीआरपीएफ के लिए कानून व्यवस्था के मोर्चे पर ये सामान्य घटना है। बल के जवान बेहतरीन कार्य करते हैं। इनकी वीरता किसी से छिपी नहीं है। 
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किसान संघर्ष में हरियाणा सरकार ने की 3 IPS-3 HPS को वीरता पदक की सिफारिश - फोटो : Amar Ujala
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की स्पेशल यूनिट 'रैपिड एक्शन फोर्स', जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा/दंगे से निपटते हुए देखा जा सकता है। गत फरवरी में हरियाणा-पंजाब के शंभू व खनौरी बॉर्डर पर किसानों के साथ पुलिस का जो संघर्ष हुआ था, उसमें हरियाणा सरकार ने अपने तीन आईपीएस और तीन एचपीएस अधिकारियों को वीरता पदक देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिफारिश कर दी। हालांकि, उसकी लिस्ट में आरएएफ का नाम नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि शंभू बॉर्डर पर संघर्ष के दौरान सीआरपीएफ/आरएएफ की 106वीं बटालियन के जवानों/अफसरों ने भी बहादुरी का परिचय दिया था। आरएएफ ने उन लोगों की भीड़ को आगे बढ़ने से रोक दिया था, जिनके हाथों में भाले व तलवार सहित कई तरह की हानिकारक सामग्री थी। हालांकि,  सीआरपीएफ मुख्यालय ने आरएएफ के उस दस्ते को किसी तरह का कोई अवॉर्ड नहीं दिया। बल ने इस संबंध में कोई सिफारिश नहीं की। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हरियाणा सरकार की वह फाइल वापस लौटा दी है, जिसमें पुलिस अफसरों को वीरता पदक देने की सिफारिश की गई है। यह भी कहा है कि इस फाइल में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों की भूमिका का उल्लेख किया जाए। संयुक्त ऑपरेशन में उनके असाधारण साहस का जिक्र हो।

तलवार व भालों से लैस थे प्रदर्शनकारी … 
बता दें कि फरवरी के दौरान शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर किसानों द्वारा अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन किया जा रहा था। किसान संगठन, दिल्ली कूच करना चाहते थे, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने नहीं दे रही थी। इसके चलते पहले शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ। उसमें दर्जनों लोगों को चोट आई थी। वहां ड्यूटी पर मौजूद दो पुलिसकर्मी मारे गए थे। कुछ दिन बाद खनौरी बॉर्डर पर भी पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष हुआ था। यहां पर किसान शुभकरण की मौत हो गई थी। शंभू बॉर्डर पर सीआरपीएफ/आरएएफ के दस्ते ने किसानों के साथ हुए संघर्ष में असाधारण बहादुरी का प्रदर्शन किया था। यह बात संघर्ष के कई वीडियो और फोटो में भी दिखाई पड़ रही थी। किसानों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने तलवार व भालों से पुलिस पर हमला बोल दिया था। आएरएफ ने जान की परवाह न करते हुए किसानों को आगे नहीं बढ़ने दिया था।

गृह मंत्री कर चुके हैं प्रशंसा … 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सीआरपीएफ की कार्यशैली, वीरता और कर्तव्य परायणता की कई बार सार्वजनिक मंच से प्रशंसा कर चुके हैं। गत वर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित बल के 84वें स्थापना दिवस पर अमित शाह ने कहा था, मैं देश के किसी भी कोने में रहूं, अगर कोई अप्रिय घटना घटती है, लेकिन जैसे पता चलता है कि सीआरपीएफ वहां पहुंच गई है तो मैं निश्चिंत होकर अपने काम में लग जाता हूं। ये सीआरपीएफ के प्रति मेरा विश्वास है। आतंकवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में इस बल की वीरता किसी से छिपी नहीं है।

इन लोगों को वीरता पदक देने की सिफारिश … 
शंभू व खनौरी बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने असाधारण साहस दिखाने वाले तीन आईपीएस व तीन एचपीएस अधिकारियों को वीरता पदक देने की सिफारिश कर दी। इनमें पुलिस महानिरीक्षक अंबाला रेंज सिबाश कबिराज, अंबाला के तत्कालीन एसपी जश्नदीप सिंह रंधावा और जींद के एसपी सुमित कुमार के नाम का प्रस्ताव किया गया। ये सभी आईपीएस अधिकारी हैं। इनके अलावा हरियाणा पुलिस सेवा (एचपीएस) के अधिकारी नरेंद्र सिंह, राम कुमार और अमित भाटिया का नाम भी वीरता पदक की सिफारिश वाली फाइल में शामिल किया गया।

वह एक संयुक्त अभियान था, एमएचए … 
गृह मंत्रालय ने उक्त अफसरों की असाधारण वीरता वाली फाइल को यह कहते हुए वापस लौटाया है, यह देखा गया है कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के कर्मियों ने भी उक्त कार्रवाई में भाग लिया था। फाइल में इनके नाम की कोई अनुशंसा तक नहीं थी। वह एक संयुक्त अभियान था।
राज्य सरकार को अपने प्रस्ताव में इसका जिक्र करना चाहिए था।

बल के जवान बेहतरीन कार्य करते हैं… 
इस बाबत सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि शंभू बॉर्डर पर किसानों को रोकने में  आरएएफ की अहम भूमिका थी। इसके बावजूद बल मुख्यालय द्वारा उक्त बटालियन के दस्ते को डीजी डिस्क नहीं दी गई। न ही किसी दूसरे अवार्ड की सिफारिश की गई। इस संबंध में सूत्रों का कहना है, सीआरपीएफ एक केंद्रीय बल है। हिंसा व दंगे की स्थिति में देश के हर हिस्से से यह मांग आती है कि वहां पर सीआरपीएफ को भेजा जाए। सीआरपीएफ के लिए कानून व्यवस्था के मोर्चे पर ये सामान्य घटना है। बल के जवान बेहतरीन कार्य करते हैं। इनकी वीरता किसी से छिपी नहीं है। 

पूर्व अग्निवीरों को सीएपीएफ व असम राइफल्स में 10% आरक्षण
केंद्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बुधवार को बताया कि दोनों बलों में 10 फीसदी रिक्तियां पूर्व अग्निवीरों के लिए होंगी। गृह राज्यमंत्री ने एक लिखित प्रश्न के जवाब में बताया कि पूर्व अग्निवीरों के लिए सीएपीएफ और असम राइफल्स में कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) और राइफलमैन के पद पर भर्ती में ऊपरी आयु सीमा में छूट और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स (एआर) में कुल स्वीकृत 10,45,751 के मुकाबले 84,106 पद खाली हैं। राय ने कहा कि मंत्रालय संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग और संबंधित बलों के माध्यम से खाली पदों को शीघ्रता से भरने के लिए कदम उठा रहा है और उठाता रहेगा। 

ये कदम उठाए...मेडिकल जांच का समय और कट ऑफ घटाया गया
राय ने बताया कि भर्ती में तेजी लाने के लिए मेडिकल जांच में लगने वाले समय को कम कर दिया गया है। वहीं कांस्टेबल/जीडी के लिए उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के लिए कट-ऑफ अंक भी घटा दिए गए हैं। इससे पर्याप्त उम्मीदवार मिल सकेंगे (खासकर उन श्रेणियों में जहां कमी देखी गई है)।

कांस्टेबल के पद पर शीघ्र भर्ती के लिए एसएससी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा, कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर और सहायक कमांडेंट (सभी सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती के लिए एक नोडल बल को सामान्य ड्यूटी पदों पर भर्ती के समन्वय के लिए दीर्घकालिक आधार पर नामित किया गया है। ब्यूरो

केंद्रीय पुलिस बलों और असम राइफल्स में 84,106 पद खाली
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स (एआर) में कुल स्वीकृत पदों 10,45,751 के मुकाबले 84,106 पद खाली हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि एक जुलाई, 2024 तक खाली पदों को भरने के लिए सरकार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया, अप्रैल, 2023 से फरवरी, 2024 के बीच 67,345 अभ्यर्थियों की भर्ती की गई। अधिसूचित 64,091 रिक्तियां भर्ती के विभिन्न चरणों में हैं।
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