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MHA Extends BSF Power: बंगाल चुनाव में शाह ने दिए थे संकेत, बीएसएफ के बाद क्या अब CRPF और SSB को मिलेंगी खास 'पावर'

सार

बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं, अगर ये व्यवस्था इतनी ही कारगर है तो उत्तर प्रदेश और बिहार, जहां नेपाल की लंबी सीमा लगती है, वहां 'एसएसबी' को यह खास पावर क्यों नहीं दी गई। पाकिस्तान द्वारा वहां से भी भारत में ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई की जाती है और आतंकी भी घुसते हैं...
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बीएसएफ के जवान - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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बीएसएफ को 50 किलोमीटर के क्षेत्र में 'खास पावर' देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस, टीएमसी और आप ने इस नई व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ये आदेश एकाएक जारी नहीं किए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले ही यह संकेत दे दिए थे, लेकिन उस वक्त न तो दीदी और न ही दूसरे विपक्षी दल उसे समझ सके। शाह ने कहा था, बंगाल पुलिस, बीएसएफ का साथ नहीं दे रही, इसलिए ट्रांसबॉर्डर क्राइम रुक नहीं पा रहा है। उसी वक्त गृह मंत्रालय की फाइलें पलटना शुरू हो गई थीं। तब राकेश अस्थाना, बीएसएफ के डीजी थे। बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं, अगर ये व्यवस्था इतनी ही कारगर है तो उत्तर प्रदेश और बिहार, जहां नेपाल की लंबी सीमा लगती है, वहां 'एसएसबी' को यह खास पावर क्यों नहीं दी गई। पाकिस्तान द्वारा वहां से भी भारत में ड्रग्स और हथियारों की सप्लाई की जाती है। आतंकी भी घुसते हैं। सीआरपीएफ में भी ऐसी चर्चा हो रही है कि नक्सल इलाके में उन्हें भी 'पुलिस' की खास शक्ति दे दी जाए।

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बता दें कि पिछले साल से ही केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र के बीच तनातनी चल रही है। लोकसभा चुनाव से पहले तो बंगाल पुलिस ने सीबीआई को बंदी बना लिया था। उसके बाद ईडी की छापेमारी के मुद्दे पर टीएमसी ने कड़े तेवर दिखाए। विधानसभा चुनाव के दौरान जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वहां पहुंचे, तो उन्होंने साफतौर पर कह दिया था कि बंगाल पुलिस, बीएसएफ का सहयोग नहीं करती। नतीजा, बॉर्डर के आसपास होने वाले क्राइम पर प्रभावी तरीके से रोक नहीं लगाई जा सकी। सूत्रों का कहना है कि शाह चाहते थे कि बंगाल चुनाव से पहले ही यह नई व्यवस्था लागू हो जाए। इस बाबत तत्कालीन डीजी राकेश अस्थाना से बातचीत हुई थी। बीएसएफ को प्रस्ताव आगे बढ़ाने के लिए कहा गया। किन्हीं कारणों से वह मामला तब सिरे नहीं चढ़ सका था।

बंगाल चुनाव के बाद जुलाई 2021 में राकेश अस्थाना को दिल्ली पुलिस आयुक्त बना दिया गया। दोबारा से बीएसएफ की पावर बढ़ाने का मसौदा तैयार किया गया। मौजूदा डीजी से कहा गया, वे इस पर प्रपोजल बनाएं। सूत्र बताते हैं कि इस बार यह सब इतनी तेजी से हुआ कि उस पर कानून मंत्रालय की राय भी अच्छे से नहीं ली जा सकी। पूर्व एडीजी संजीव कृष्ण सूद कहते हैं, यह नई मुहिम इतनी प्रभावी है तो दूसरी जगहों पर इसे इस्तेमाल करके देखना चाहिए। उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ लगते नेपाल बॉर्डर पर गैर-कानूनी गतिविधियां होती रहती हैं। वहां पर एसएसबी को भी ऐसी पावर दे दी जाए। सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने भी इसका समर्थन किया है। उनका कहना है कि नक्सल और दूसरी ऐसी जगहों पर सीआरपीएफ को भी एक तय क्षेत्र में गिरफ्तारी, तलाशी व जब्ती की शक्ति प्रदान कर दी जाए।

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बीएसएफ के पास संसाधनों का अभाव रहेगा तो मुश्किलें भी आएंगी

पश्चिम बंगाल में बॉर्डर पर रोजाना ही बीएसएफ द्वारा नशीला पदार्थ और दूसरी वस्तुएं पकड़ी जाती हैं। गायों की बड़े पैमाने पर तस्करी होती है। सीमा पार यानी बांग्लादेश में उनका बाजार लगता है। देश के कई हिस्सों से पशुओं को ट्रकों में भरकर बंगाल की सीमा तक लाया जाता है। उसके बाद उन्हें बांग्लादेश की सीमा में धकेलने का प्रयास होता है। सवाल ये है कि गायों से भरे ट्रक बीच में दर्जनों चेक पोस्टों पर किसी को नजर नहीं आते। न तो आरटीओ और न ही स्थानीय पुलिस उन्हें पकड़ पाती है। बीएसएफ के पूर्व आईजी विकास चंद्रा कहते हैं, ये बात सही है कि वहां यह सब हो रहा है। अब बीएसएफ को 50 किलोमीटर के क्षेत्र में जब्ती, चेकिंग या गिरफ्तारी करने का अधिकार मिल गया है। बल को जो काम बॉर्डर पर करना पड़ता था, वह अब दूर जाकर हो सकेगा। जैसे बीएसएफ को यह मालूम हो गया कि फलां पोस्ट पर गैर-कानूनी सामान आ रहा है, जवान उसका इंतजार करते थे। अब उस जगह पर ही छापा मारा जा सकेगा, जहां से वह माल ट्रक में लादा जाता है। अगर वह जगह पचास किलोमीटर के दायरे में है। संसाधन तो उपलब्ध कराने होंगे। बीएसएफ को गाड़ियां, जवान और संचार के साधन चाहिएं। इंटेल सिस्टम मजबूत करना होगा। स्थानीय पुलिस के साथ टकराव नहीं, बल्कि सहयोग ही रहेगा।
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कांग्रेस की चुनी हुई सरकार के अधिकारों पर हमला: रणदीप   

भाजपा अपने खत्म हुए राजनीतिक अस्तित्व को तलाशने के लिए कांग्रेस की चुनी हुई सरकार के अधिकारों पर हमला बोल रही है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ड्रग्स तो गुजरात में भी पकड़े जाते हैं। 9 जून, 2021 को 25,000 किलो हेरोइन, ड्रग्स अडानी पोर्ट से आते हैं, पकड़े भी नहीं जाते, जो इस समय देश के युवाओं को नशे में धकेल रहे हैं। 13 सितंबर को 3,000 किलो, 21,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी जाती हैं, वो भी अडानी पोर्ट गुजरात में जब्त हुए हैं। वहां तो लिमिट 80 किलोमीटर थी, तो 80 किलोमीटर की लिमिट में ड्रग्स क्यों नहीं पकड़ पाए। ड्रग्स आए गुजरात में और आप अधिकार छीन रहे हैं पंजाब के। 73 साल से ये 15 किलोमीटर की लिमिट चल रही है। 73 साल में तो कुछ गलत हुआ नहीं, तो आज क्या हो गया। केवल कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को कुरेदना, कुचलना, संविधान को खत्म करना और भाजपा के खोए हुए अस्तित्व को दोबारा से हासिल करना ही इस नई व्यवस्था का मकसद है। सुरजेवाला ने कहा, मोदी सरकार ने एक बार फिर देश के संघीय ढांचे पर हमला किया है। देश में चुनी हुई सरकारों के अधिकारों को खत्म करने का घिनौना प्रयास किया है।
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