केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के संचालक आसिफ मकबूल डार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम), 1967 के तहत 'आतंकवादी' घोषित किया है। जम्मू-कश्मीर निवासी डार वर्तमान में सऊदी अरब में रहता है।
मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में जानकारी दी गई है कि डॉ. आसिफ मकबूल बारामूला के वगूरा के बांदे पाईंन का निवासी है, वर्तमान में सऊदी अरब के दमन, अश शरकियाह, धहरान से हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा हुआ है।इसमें कहा गया है कि आसिफ मकबूल डार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके कश्मीर घाटी के युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने या भड़काने में शामिल है।
अधिसूचना में कहा गया है, आसिफ मकबूल डार सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी आवाजों में से एक है और भारत सरकार व सुरक्षा बलों के खिलाफ हथियार उठाने के लिए कश्मीरी युवाओं को नापाक तरीके से प्रभावित करने में शामिल है।
इसमें आगे कहा गया, आसिफ मकबूल डार जम्मू-कश्मीर और नई दिल्ली सहित भारत के प्रमुख शहरों में हिंसक आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आतंकवादी संगठन के कैडरों द्वारा रची गई साजिश से जुड़े एक मामले में आरोपी है, जिसकी जांच एनआईए के द्वारा की गई थी। आसिफ मकबूल यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित होने वाला 52वां शख्स है।
इससे पहले गृह मंत्रालय ने लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य अरबाज अहमद मीर को एक महिला शिक्षक रजनी बाला समेत जम्मू कश्मीर में टारगेट किलिंग में शामिल होने के लिए यूएपीए, 1967 के तहत आतंकवादी घोषित किया था।
शुक्रवार की रात अधिसूचना जारी करते हुए गृह मंत्रालय ने कहा, जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है। वह वर्तमान में पाकिस्तान में है और सीमा पार से लश्कर के लिए काम कर रहा है। मीर टारगेट किलिंग में शामिल हैं और जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में एक शिक्षिका रजनी बाला की हत्या में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में उभरा है।
मीर कश्मीर घाटी में आतंकवाद के समन्वय में भी शामिल है और सीमा पार से अवैध हथियारों या गोला-बारूद या विस्फोटकों का ट्रांसपोर्ट करके आतंकवादियों का समर्थन करता है। रजनी बाला की बीते साल 2022 में 31 मई को उनकी हाई स्कूल (गोपालपारा) में हत्या कर दी गई थी।