पीजीआईएमएस रोहतक के निदेशक डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि ऐसा कोई नशा नहीं है, जो हरियाणा में नहीं हो रहा। जब तक सप्लाई सिस्टम नहीं टूटेगा तब तक प्रदेश को ड्रग्स से नहीं बचाया जा सकता। हम उन लोगों की काउंसिलिंग कर उन्हें मुख्य धारा में ला सकते हैं, जो हमारे पास आते हैं। लेकिन जो तबका हमारे पास नहीं आता, उसका क्या करें। कई नशे के कंपोनेंट ऐसे होते हैं जो अन्य नशों से मिलते हैं, लेकिन पकड़ में आने से बचने के लिए उनका नाम बदल लिया जाता है।
जितना खतरनाक नशा, विधि भी उतनी खतरनाक
म्याऊं-म्याऊं नशा स्मैक की तरह प्रयोग होता है और चीन से आता है। जबकि स्नेक बाइट में युवा एक विशेष प्रजाति के सांप से अपनी जीभ पर डंक मरवाते हैं और नशे में झूमने लगते हैं। इसके अलावा कुछ लोग छिपकली को सूखा कर उसका पाउडर बना कर तंबाकू के रूप में प्रयोग करते हैं।
म्याऊं-म्याऊं है रिक्रिएशनल ड्रग- डॉ. सुनीला राठी
स्टेट ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर रोहतक के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनीला राठी का कहना है कि नशे का नया ट्रेंड युवाओं में अधिक देखने को मिल रहा है। म्याऊं-म्याऊं विदेश से आने वाला एक रिक्रिएशनल ड्रग है। इसे लेने के बाद व्यक्ति सोशल हो जाता है और उसका फ्रेंडली बिहेवियर हो जाता है। वह लंबे समय तक इंज्वाय करता है।
स्नेक बाइट के नशे में युवा अपनी जीभ के साइड में डंक मरवाते हैं, इसके लिए 1000 से 2000 रुपये कीमत दी जाती है। इससे व्यक्ति को पूरा दिन नशा रहता है। छिपकली का नशा नार्मल है। इसका नशा करने वाले छिपकली को मार कर नमक व हल्दी लगा कर सुखा लेते हैं। इसके बाद इसके पाउडर को बीड़ी सिगरेट में तंबाकू के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हैरानी की बात है कि इस प्रकार के नशे में लड़कियां भी शामिल हैं, समस्या होने पर वह अपनी प्राइवेसी के लिए निजी नशा मुक्ति केंद्र में उपचार के लिए जाती हैं।
कम उम्र के युवाओं में पॉपुलर है म्याऊं-म्याऊं
म्याऊं-म्याऊं 20 से 22 साल के नौजवानों में अधिक पसंद किया जाता है। यह 200 रुपये प्रति ग्राम की कीमत पर मिल जाता है और एक बार में दो ग्राम से ज्यादा नहीं लिया जाता। इसकी कम कीमत भी इसकी लोकप्रियता को बढ़ा रही है। यह टैबलेट और पाउडर के रूप में मिलता है। इसे निगल कर, इंजेक्शन से या सूंघ कर लिया जाता है। फरवरी से पहले यह नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटैंसेज एक्ट में शामिल नहीं था। मुंबई में इसका प्रचलन बढ़ने पर इसे प्रतिबंधित किया गया था।