लोकसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग सख्ती बरत रहा है। इसी क्रम में आयोग ने मेघालय में वॉयस ऑफ द पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) को उसके समर्थकों द्वारा आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दरअसल, वीपीपी के समर्थकों पर कई स्थानों पर सार्वजनिक सभाओं के दौरान नारे लगाकर सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चुनाव प्रचार को बाधित करने का आरोप है।
वीपीपी प्रमुख को भी नोटिस
वहीं, शिलांग संसदीय क्षेत्र के निर्वाचन अधिकारी एससी साधु ने भी वीपीपी प्रमुख अर्देंट बसाइवमोइत को एक नोटिस जारी किया है। दरअसल, एनपीपी उम्मीदवार अंपारीन लिंगदोह के चुनाव एजेंट ने वीपीपी पर आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके फर्जी खबरें फैला रही है।
12 अप्रैल तक मांगा जवाब
अधिकारी ने बताया कि बसाइवमोइत से 12 अप्रैल तक जवाब देने को कहा गया है। अगर तय समय में जवाब नहीं दिया तो उनकी पार्टी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
रिटर्निंग ऑफिसर को दी शिकायत में एनपीपी ने वीपीपी समर्थकों पर सोमवार को री-भोई जिले में पार्टी की चुनावी सभाओं को बाधित करने का आरोप लगाया। एनपीपी का आरोप है कि वीपीपी समर्थकों ने कथित तौर पर नारे लगाए जबकि पूर्व विधायक और एनपीपी के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष हैमलेटसन दोहलिंग वहां एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
एक अधिकारी ने बताया कि एनपीपी के उम्मीदवार के भाषण से पहले दोनों दलों के समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई थी, जिसके कारण जनसभा को रोक दिया गया था। इस बीच, एनपीपी नेता मैग्डलीन एस मावलोंग के री-भोई जिले के उमसनिंग स्थित आवास पर बुधवार को पथराव किया गया।
अधिकारी ने बताया कि पुलिसकर्मियों का एक दल मावलोंग के घर पहुंचा जहां उन्होंने फर्श पर पत्थर और टूटे शीशे देखे। उन्होंने बताया कि उमियम पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।