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संवेदनशील मामलों में मीडिया ट्रायल की छूट नहीं दे सकते: सुप्रीम कोर्ट

Wed, 12 Sep 2018 02:03 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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प्रेस को अपने लिए एक लाइन (सीमा रेखा) तय करनी चाहिए और एक संतुलन बनाए रखना चाहिए, क्योंकि मामलों के मीडिया ट्रायल की छूट नहीं दी जा सकती है। ये टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए की, जहां करीब 30 लड़कियों के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया था। इस मामले में 11 लोगों पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ है।

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शीर्ष न्यायालय पटना के एक पत्रकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पटना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। पटना हाई कोर्ट ने 23 अगस्त को मीडिया को मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की जांच की रिपोर्टिंग करने से रोक दिया था। 

जस्टिस मदन बी. लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मुद्दा सामान्य नहीं है। मीडिया को रिपोर्टिंग करते हुए संतुलन बनाए रखना चाहिए। आप वह सब नहीं कह सकते, जो आपको कहना अच्छा लग रहा हो। आप मीडिया ट्रायल नहीं चला सकते। हमें बताइए कि कहां सीमा रेखा खींचनी चाहिए। 

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बिहार सरकार व सीबीआई को नोटिस

शीर्ष न्यायालय ने बिहार राज्य सरकार और इस रेप कांड की जांच कर रही सीबीआई को नोटिस जारी किया है। इन सभी को 18 अक्टूबर को अगली सुनवाई के दौरान इस याचिका को लेकर अपना पक्ष रखने को कहा है। इसी दिन हाईकोर्ट की तरफ से लगाए प्रतिबंध को हटाने के मीडिया  के आग्रह पर भी विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट की तरफ से तैनात एमिकस क्यूरी को रोका
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पटना हाईकोर्ट की तरफ से इस मामले में एमिकस क्यूरी बनाई गई महिला एडवोकेट को पीड़ित लड़कियों से मिलने और पूछताछ करने से रोक दिया गया है। शीर्ष न्यायालय ने इसे अपने इस मामले में पूर्व में दिए आदेश के खिलाफ बताया है। उन्होंने एमिकस क्यूरी के बजाय पीड़िताओं से पूछताछ के लिए जांच एजेंसी को एक बार फिर पेशेवर काउंसलरों और बाल मनोचिकित्सकों की मदद लेने के निर्देश दिए हैं।
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