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पायलट ने इस्तेमाल किया मेडे शब्द और बच गई 194 यात्रियों की जान, ये हैं इसके मायने

Wed, 10 Oct 2018 04:08 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाल ही में अमेरिकी एयरलाइंस का एक विमान बड़े हादसे का शिकार होने से बच गया। विमान में 194 यात्री सवार थे। लेकिन पायलट की समझदारी से सभी की जान बच गई। दरअसल उसने मेडे शब्द का प्रयोग किया था। बता दें लैंडिंग से पहले पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को मेडे शब्द से संकेत देते हैं। चलिए बताते हैं आपको इस शब्द का मतलब और क्यों किया जाता है इसका इस्तेमाल।

मेडे शब्द का इस्तेमाल उस वक्त किया जाता है, जब विमान और उसमें मौजूद यात्री किसी बड़े संकट में हों। यानि उनका संकट चरम पर हो। इस शब्द का इस्तेमाल एविएशन या मरीन ट्रैफिक कंट्रोल के लिए बनी टर्मिनोलॉजी के तहत किया जाता है। इस शब्द का इस्तेमाल पायटल उस समय करता है जब उसे अहसास हो कि उसकी और यात्रियों की जान खतरे में है।
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सबसे पहले 1923 में हुई था इस्तेमाल

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इस शब्द का इस्तेमाल साल 1923 में सबसे पहले हुआ था। ये शब्द उस समय लंदन एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) के वरिष्ठ रेडियो अफसर फ्रेडरिक स्टेनली मैकफोर्ड ने किया था। मैकफोर्ड को उसके अधिकारियों ने ये जिम्मेदारी दी थी कि वह ऐसे शब्द को ईजाद करें जिसका आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके।
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फ्रेंच शब्द से निकला मेडे

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यह भी कहा गया कि शब्द ऐसा हो जिसे पायलट और ग्राउंड स्टाफ समझ सकें। लंदन से पेरिस के बीच एयर ट्रैफिक को कंट्रोल करने के दौरान मैकफोर्ड ने इस शब्द का इस्तेमाल किया। शब्द ईजाद करना इसलिए आवश्यक था क्योंकि क्योंकि मदद के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द हेल्प आपात स्थिति के अलावा भी इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं वॉइस रेडियो कम्यूनिकेशन के आम होते जाने के कारण एसओएस शब्द के समतुल्य भी एक शब्द चाहिए था।

एयर ट्रैफिक कंट्रोल का काम करते हुए मैकफोर्ड ने फ्रेंच शब्द से मेडे का ईजाद किया। उन्हें जो शब्द सूझा वह था 'एम एडर'। इसका मतलब है मेरी मदद करो। इसी शब्द का अंग्रेजीकरण करते हुए मैकफोर्ड ने मेडे शब्द को चुना। और फैसला लिया कि विमान के संकट के चरम पर होने का संकेत देने के लिए इसी शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा।

साल 1927 में इस शर्त पर मिली अंतरराष्ट्रीय अनुमति

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इस शब्द को अंतरराष्ट्रीय मंजूरी साल 1927 में वॉशिंगटन में हुए इंटरनेशनल रेडियो टेलीग्राफ कन्वेेशन में मिली। तब इस शब्द को आधिकारिक वॉइस डिजास्टर कॉल घोषित किया गया। इसके साथ ही यह शर्त भी रखी गई कि शब्द का इस्तेमाल पायलट और रेडियो अधिकारी उसी समय कर सकते हैं जब उन्हें बचने का और कोई रास्ता न दिख रहा हो। हालांकि आजकल मेडे का इस्तेमाल शिप्स के कैप्टन और मरीन रेडियो कंट्रोलर भी करने लगे हैं।
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इतनी बार पायलट को कहना पड़ेगा मेडे

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एक्सपर्टस के मुताबिक पायलट को तीन बार मेडे शब्द का इस्तेमाल करना होता है। ऐसा करने का फैसला इसलिए लिया गया ताकि बाकी आवाजों के बीच रेडियो कंट्रोलर इसे आसानी से पहचान सकें और इस बात को पक्का किया जा सके कि पायलट को सच में मदद की जरूरत है।
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पैन पैन शब्द का भी होता है इस्तेमाल

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पायलट आपात स्थिति में पैन पैन शब्द का भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इसका इस्तेमाल मेडे से कम जोखिम वाली स्थिति में किया जाता है। पैन पैन का संकेत दे पायलट जोखिम वाली स्थिति में मदद मांगता है। पैन पैन का संकेत उस समय दिया जाता है जब जान जोखिम में न हो लेकिन उड़ान में परेशानियां आ रही हों। लेकिन दोनों ही स्थितियों में विमान का नियंत्रण पायलट के हाथों में होता है।
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