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चीन-पाकिस्तान को विदेश मंत्रालय की दो टूक: जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग; बयान में उल्लेख बेवजह-निराधार

Thu, 13 Jun 2024 05:32 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

MEA on China-Pak Joint Statement: विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन और पाकिस्तान के नवीनतम संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र बिना वजह किया गया। भारत ने दो टूक संदेश में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और बने रहेंगे।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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चीन और पाकिस्तान को कई मौकों पर भारत से मुंह की खानी पड़ी है। लेकिन दोनों देश भारत के खिलाफ कोई-न-कोई साजिश रचते ही रहते हैं। ताजा घटनाक्रम में 7 जून को बीजिंग में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीन के प्रधानमंत्री ली क्यांग ने एक साझा बयान जारी किया। इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने कश्मीर के मुद्दे को हल करने के लिए एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया था। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर 7 जून को चीन और पाकिस्तान के साझा अनुचित बयानों को देखा है। हम इस तरह के बयानों को पूरी तरीके से खारिज करते हैं।
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भारत ने चीन और पाकिस्तान को दो टूक संदेश में कहा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे। सरकार ने जम्मू-कश्मीर के उल्लेख को 'निराधार' बताते हुए खारिज कर दिया। बता दें कि पिछले सप्ताह चीन और पाकिस्तान की तरफ से जारी संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर टिप्पणी की गई थी।

किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में इसके अलावा कई और अंतरराष्ट्रीय और सामरिक मुद्दों पर बयान दिया। रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर भारत अपनी स्थिति पहले ही साफ कर चुका है, और किसी अन्य देश को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। 
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चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर भी टिप्पणी
इस दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर भी तीखी टिप्पणी की, जो चीन-पाक की द्विपक्षीय बैठक का एक अहम मुद्दा रहा। उन्होंने कहा, साझा बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के अंतर्गत गतिविधियों और परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से कुछ भारत के संप्रभु क्षेत्र में हैं, जो पाकिस्तान द्वारा जबरन और अवैध कब्जे में हैं।"

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल अपने बयान में आगे कहा कि "भारत इन क्षेत्रों पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को मजबूत करने या वैध बनाने के लिए अन्य देशों के किसी भी कदम का पूरी तरह से विरोध करता है और उसे पूरी तरह से अस्वीकार भी करता है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर अतिक्रमण करता है।
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