विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस कांफ्रेंस कर कई विषयों पर विदेश मंत्रालय का रुख साफ किया है। इसमें उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता की मेजबानी ही साथ ही म्यांमार के विद्रोहियों द्वारा भारत के साथ सीमा पर नियंत्रण करने की कोशिश पर सरकार का रुख पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने कनाडा में भारत के उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास को लेकर जानकारी दी।
भारत-ऑस्ट्रेलिया 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हम 2+2 और फिर इसके अगले संस्करण की मेजबानी करने का भी इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा कि इसका उद्घाटन संस्करण आखिरी था, लेकिन हमने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि मेरे पास इस बारे में कोई अपडेट नहीं है। बावजूद इसके अब इसकी मेजबानी करने की हमारी बारी है और हम इसे बहुत जल्द मेजबानी करना चाहेंगे।
अरिंदम बागची ने म्यांमार की स्थिति पर जताई चिंता
इसके अलावा, अरिंदम बागची ने म्यांमार के चिन राज्य में दो सैन्य अड्डों पर विद्रोही समूह पीपुल्स डिफेंस फोर्स के हमले के बाद भारत से लगी सीमा पर विद्रोहियों की ओर से नियंत्रण किए जाने संबंधी अटकलों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने म्यांमार के विद्रोहियों द्वारा सीमा पर नियंत्रण करने की कोशिश पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हम अपनी सीमा के करीब ऐसी घटनाओं से बेहद चिंतित हैं। म्यांमार में चल रही स्थिति पर हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है। हम हिंसा को खत्म करना चाहते हैं। हम रचनात्मक बातचीत के माध्यम से स्थिति की बहाली या समाधान की बात करते हैं। हम म्यांमार में शांति, स्थिरता और लोकतंत्र की वापसी के लिए अपना आह्वान दोहराते हैं। उन्होंने कहा कि म्यामांर में साल 2021 में संघर्ष शुरू हुआ था। जिसके बाद से बड़ी संख्या में म्यांमार के नागरिक भारत में शरण ले रहे हैं। ऐसे में म्यामांर सीमा के भारती. राज्यों में स्थानीय अधिकारी मानवीय आधार पर स्थिति को उचित रूप से संभाल रहे हैं।
वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन कल से
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि दूसरा वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन कल वर्चुअल मोड में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उद्घाटन सत्र सुबह 10 बजे शुरू होगा। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे से इसमें चार समानांतर मंत्रिस्तरीय सत्र होंगे। दोपहर में चार और समानांतर मंत्रिस्तरीय सत्र निर्धारित हैं। ये शाम 04:00 बजे शुरू होंगे। इनमें विदेश मंत्री और ऊर्जा मंत्रियों के सत्र शामिल होंगे। स्वास्थ्य और वाणिज्यऔर अंत में, फिर से एक लीडर सत्र होगा। इसका समापन सत्र शाम 06:30 बजे होगा।
कनाडा पर भी की बात
इस दौरान उन्होंने कनाडा को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कनाडा में हमारा उच्चायोग और वाणिज्य दूतावास नियमित रूप से कांसुलर शिविरों का आयोजन करते हैं। ऐसा ही एक शिविर पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाण पत्र प्रदान करने के लिए 12 नवंबर को वैंकूवर के पास आयोजित किया गया था। कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा इसे बाधित करने की कोशिशों के बावजूद यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था। हमारे महावाणिज्य दूत उस स्थल पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रों को राजनयिक संबंधों पर वियना कन्वेंशन का सम्मान करने की आवश्यकता दोहराते हैं ताकि हमारे राजनयिक अपने राजनयिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने आगे कहा कि जहां तक उन घटनाओं का सवाल है जिनका आपने दिवाली में ब्रैम्पटन या मिसिसॉगा के पास जिक्र किया था। मुझे लगता है कि यह दोनों समूहों के बीच अशांति की प्रकृति में था। मुझे नहीं लगता कि वहां कोई घटना हुई है। हमारे वाणिज्य दूतावास को शिकायत मिली है। इसके अलावा, मैंने कुछ सोशल मीडिया रिपोर्ट देखी हैं। वहां के अधिकारी उस घटना की जांच कर रहे हैं, इसलिए मेरे पास इसमें जोड़ने के लिए और कुछ नहीं है।
हमास-इस्राइल जंग पर भी कही यह बात
इसके अलावा उन्होंने गाजा में अल-शिफा अस्पताल को लेकर कहा कि यह सुविधा के बारे में नहीं है। भारत ने हमेशा मानवीय राहत की आवश्यकता को रेखांकित किया है। हमने वहां तनाव कम करने के बारे में भी बात की है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकी हमलों की निंदा करता हैं।
यमन में भारतीय नागरिक की मौत की सजा के मुद्दे पर भी बोले
यमन में भारतीय नागरिक की मौत की सजा मामले में भी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यमन की राजधानी सना की शीर्ष अदालत ने उसकी दया याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली हालिया घटनाक्रम से अवगत है और मामले पर नजर बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि भारत उस भारतीय नागरिक को हर संभव राजनयिक सहायता प्रदान कर रहा है, लेकिन चूंकि यह वहां भी एक कानूनी मुद्दा है। ऐसे में हम जो भी कांसुलर सहायता कर सकते हैं, दे रहे हैं। लेकिन यह उनके देश में भी एक कानूनी प्रक्रिया है। हम देखेंगे कि हम किस तरह से इस प्रक्रिया को जारी रख सकते हैं।
बता दें कि यह मामला एक भारतीय नागरिक से जुड़ा है। उसे 2020 में यमन में मौत की सजा सुनाई गई थी। उसकी अपील को अपीलीय अदालत और फिर यमन के सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। उस पर एक यमनी नागरिक की हत्या का आरोप है।
एफटीए को लेकर हुई थी चर्चा
इस दौरान उन्होंने भारत-ब्रिटेन एफटीए को लेकर भी जानकारी दी। बागची ने कहा कि विदेश मंत्री जयशंकर की यूके के पीएम सुनक के साथ मुलाकात के दौरान एफटीए पर चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि हम कैसे इस मुद्दे पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं।
कतर के मामले पर हमारी नजर
साथ ही उन्होंने कहा कि कतर की एक अदालत से आठ पूर्व भारतीय नौसेना कर्मियों को दी गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की प्रक्रिया चल रही है और उम्मीद है कि इसका सकारात्मक नतीजा निकलेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत इस मामले पर कतर के अधिकारियों के साथ संपर्क में है और सरकार भारतीय नागरिकों को सभी कानूनी तथा दूतावास संबंधी सहायता देना जारी रखे है।