पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव को सैन्य अदालत की ओर से उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ समीक्षा अपील दायर करने का अधिकार देने के लिए पाकिस्तान की संसद ने बुधवार को अपनी संयुक्त बैठक में एक कानून बनाया था। इस पर गुरुवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा कि हमने उन रिपोर्ट को देखा है कि कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान उस अध्यादेश को कानून में शामिल कर रहा है जो स्पष्ट तौर पर अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को प्रभाव में लाने के लिए पहले लागू किया गया था।
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बागची ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लाया गया यह अध्यादेश अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले के अनुसार जाधव के मामले में प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार के लिए कोई तंत्र तैयार नहीं करता है। पाकिस्तान जाधव को बिना किसी बाधा के कौंसुलर पहुंच देने से लगातार इनकार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत लगातार पाकिस्तान से कह रहा है कि वह इस मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का पूरी तरह से पालन करे।
भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (51) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। भारत ने जाधव को राजनयिक पहुंच देने और सजा को चुनौती देने के लिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का रुख किया था।
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मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जुलाई 2019 में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पाकिस्तान भारत को जाधव तक राजनयिक पहुंच देने और जाधव को सुनाई गई सजा की समीक्षा सुनिश्चित करना सुनिश्चित करे। हालांकि, पाकिस्तान ने अभी तक इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।