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राज्यसभा में जयशंकर ने कहा: अफगानिस्तान को सेना के हवाले करने के खिलाफ हैं अमेरिका-भारत

Fri, 30 Jul 2021 04:01 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • राज्यसभा में विदेशमंत्री ने कहा, ताकत के दम पर नहीं हथियाई जानी चाहिए सत्ता
  • जयशंकर ने कहा, अफगानिस्तान का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं निकल सकता है
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राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और अमेरिका अफगानिस्तान को सेना के हवाले करने के खिलाफ हैं। विदेशमंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में बताया कि अमेरिकी विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर व्यापक चर्चा हुई और दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि गृहयुद्ध की मार झेल रहे अफगानिस्तान में ताकत के दम पर सत्ता नहीं हथियाई जानी चाहिए।

उच्च सदन में अफगानिस्तान के बारे में अनुपूरक सवाल पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, भारतीय नेतृत्व ने इस पर बात पर जोर दिया है कि वैश्विक मुद्दों के प्रति हमारा नजरिया बेहतरीन गठजोड़ बनाए जाने पर आधारित होता है, मगर हम ऐतिहासिक गलतियों को ठीक करना चाहते हैं। जब स्वतंत्रता की बात आती है, तो हमें जिम्मेदारी लेने से नहीं बचना चाहिए। इस पर हमारी बातचीत संतुलित होनी चाहिए।

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उन्होंने कहा, अफगानिस्तान का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं निकल सकता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करेंगे कि किसी समझौते के लिए राजनीतिक बातचीत को गंभीरता से लिया जाए और हम ताकत के दम पर हासिल किए गए परिणाम को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इससे पहले ब्लिंकन से मुलाकात में जयशंकर ने कहा, हम बेहद स्पष्ट हैं कि अफगानिस्तान मसले पर बातचीत होनी चाहिए और  राजनीतिक बहाली हो।

सुरक्षा के लिए जो जरूरी होगा सरकार करेगी : जयशंकर
विदेशमंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा, सरकार वह करेगी। देश की रक्षा के लिए सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। प्रश्नकाल में एक पूरक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा कि देश को विश्वास है कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में उसके सहयोगी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े हितों को अपनी कोशिशों से पूरा करने की भारत की नीति में उसके कई अंतरराष्ट्रीय सहयोगी साथ हैं।
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पाकिस्तान-चीन के कश्मीर जिक्र पर भारत ने जताया एतराज
भारत ने पाकिस्तान और चीन द्वारा हाल ही में एक संयुक्त प्रेस बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किए जाने पर कड़ा एतराज जताते हुए उसे दृढ़ता से खारिज किया और कहा कि लद्दाख समेत यह केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है और रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने बयान में तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के उल्लेख पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह भारतीय क्षेत्र में है जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।

उन्होंने कहा, पहले की तरह ही भारत जम्मू-कश्मीर के किसी भी जिक्र को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। हम पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में अन्य देशों द्वारा यथास्थिति को बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं और साथ ही पाकिस्तान द्वारा अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों में किसी भी जमीनी बदलाव का भी विरोध करते हैं। हम संबंधित पक्षों से इस तरह की कार्रवाइयों को रोकने का आह्वान करते हैं। सीपीईसी के उल्लेख पर बागची ने कहा कि भारत ने चीन और पाकिस्तान दोनों को लगातार बताया है कि तथाकथित सीपीईसी भारत के क्षेत्र में है।

स्थायी राजनीतिक हल चाहता है भारत
विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कहा है कि अफगानिस्तान में संप्रभुता, लोकतंत्र और शांति के समर्थन में हमारी दृढ़ नीति है और वह अफगानिस्तान में स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए उठाए गए सभी कदमों का समर्थन करेगा। इस मामले पर भारत अफगानिस्तान के बाहर और भीतर सभी अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय पक्षों के साथ संपर्क में हैं। भारत एक समावेशी अफगानों की अगुवाई में अफगान के अधीन और अफगान द्वारा नियंत्रित प्रक्रिया के जरिये स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए सभी शांति पहलों का समर्थन करता है, ताकि क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रहे। निकटतम पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार होने के नाते भारत के पास संप्रभु, लोकतांत्रिक-शांतिपूर्ण अफगानिस्तान के लिए एक स्थायी नीति है, जिससे सभी वर्गों समेत अफगानी समाज के सभी वर्गों के हितों की रक्षा की जाती है।

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