रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने उभरती प्रौद्योगिकियों और जहाज निर्माण के भविष्य पर चर्चा करते हुए कहा कि अन्य देशों के अद्योगों की मदद से भारत की जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता। इसलिए, भारत को विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी चीज की निरंतर आपूर्ति या आधुनिक उपकरणों के लिए भारत का दूसरे देशों पर निर्भर रहना असंभव है।
आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता- अरमाने
रक्षा सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को आत्मनिर्भर होकर खुद ही अपने लिए निर्माण करना होगा। अरमाने ने क्षमताओँ को विकसित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत को नई तकनीक की आवश्यकता है। रक्षा सचिव ने यह भी कहा कि उन संस्थानों और युवाओं का साथ देना जरूरी है, जो अपने स्टार्टअप शुरू कर देश की प्रगति में योगदान करने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम ऐसे संस्थानों के साथ नहीं जुड़े तो नए प्रयोगों से समाधान प्राप्त करना मुश्किल होगा। रक्षा सचिव ने कहा कि भारतीय नौसेना अब भारत-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा में योगदान देने में प्रमुख भूमिका निभा रही है।
मझगांव शिपबिल्डर लिमिटेड की स्थापना के 250 वर्ष
भारतीय नौसेना के लिए जहाज तैयार करने वाली कंपनी मझगांव शिपबिल्डर लिमिटेड (एमडीएल) की स्थापना के 250 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने कहा कि एमडीएल भारत के मुकुट पर एक बेशकीमती रत्न की तरह है। उन्होंने कहा कि एमडीएल ने नौसेना के बेड़े की ताकत बढ़ाने और जहाजों को तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
250 साल पूरे होने पर जारी किया सिक्का
रक्षा सचिव अरमाने ने एमडीएल के 250 साल पूरे होने के उपलक्ष में एक सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा कि एमडीएल देश का सबसे बड़ा शिपयार्ड (जहाजों को तैयार करने का स्थान) है, जहां भारतीय नौसेना के अधिकतर जहाजों को तैयार किया जाता है।
एमडीएल ने किया नई पनडुब्बी और सौर नाव का शुभारंभ
अपने 250 वर्ष पूरे होने पर एमडीएल ने पहली बार 'एरोवाना' पनडुब्बी को लोगों के बीच पेश किया। इसका उद्घाटन रक्षा सचिव अरमाने ने किया। बता दें कि कंपनी द्वारा 1984 से पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। इस दौरान एक सौर विद्युत हाइब्रिड नाव का भी शुभारंभ किया गया। यह नाव 11 समुद्री मील की रफ्तार भर सकती है। इस नाव में बाकी नावों के मुकाबले बेहद कम डीजल का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा इसके रख-रखाव का खर्च भी बहुत कम है।