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मंदी में भी गुलजार है मसाज सेंटर्स का गुलाबी धंधा, फुल और हाफ सर्विस से कमा रहे करोड़ों रुपये

Mon, 09 Sep 2019 08:27 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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मंदी की मार से जहां देश के कोर सेक्टर्स के आर्थिक हालात नाजुक बने हुए हैं, वहीं देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक 'बिजनेस' ऐसा भी है जो मंदी में भी गुलजार है। यहां बात हो रही है मसाज-स्पा सेंटरों की। सिविक एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में करीब 900 मसाज सेंटर खुले हैं। अगर इनकी सर्विस को मिलाकर एक दिन की कमाई का ग्राफ देखें तो वह साढ़े सात करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाता है।

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भले ही कागजों में ये सेंटर जीएसटी के दायरे में आते हों, लेकिन स्पा सेंटर के काउंटर पर कैश लेकर ग्राहक को अंदर भेज दिया जाता है। कई जगहों पर मसाज सेंटर मालिक जीएसटी के दायरे से  बाहर रहने के लिए अपना सालाना कलेक्शन बीस लाख रुपये से ज्यादा नहीं दिखाते।

लगातार बढ़ रही है ग्राहकों की संख्या

राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे स्पा या मसाज सेंटर्स के लिए लोगों का क्रेज दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पिछले साल दिल्ली में करीब आठ सौ स्पा सेंटर थे, आज इनकी संख्या 900 का आंकड़ा पार कर गई है। खास बात है कि मंदी के दौर में इन सेंटरों पर मिलने वाली विभिन्न सेवाओं के रेट भी बढ़ गए हैं। इसके बावजूद ग्राहकों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। पहले ग्राहक से यह पूछा जाता था कि बताएं आप कैसा मसाज लेंगे।

उन्हें थाई, स्वीडिश, डिप टिश्यू, ड्राई मसाज, ऑयल मसाज, ट्रिगर प्वाइंट या थाई थैरेपी आदि दर्जनभर मसाज का विकल्प दिया जाता था। आज हालत यह है कि स्पा सेंटर में काउंटर पर फीस जमा कराने के बाद ग्राहक जब रुम में पहुंचता है, तो मसाज गर्ल्स का पहला सवाल होता है कि आप फुल सर्विस लेंगे या हाफ सर्विस। 

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द्वारका मेट्रो लाइन पर रमेश नगर मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित स्पा सेंटर मालिक मो. युनूस, देवेश व सोनिया का कहना है, अब यह धंधा बढ़ता जा रहा है। आप दिल्ली के किसी भी हिस्से में चले जाएं, खासतौर से बड़ी मार्केट और मेट्रो स्टेशनों के आसपास हर माह कोई न कोई नया स्पा सेंटर खुल रहा है।

क्या है फुल या हाफ सर्विस 

सभी जानते हैं कि फुल सर्विस में अश्लीलता की सभी सीमाएं लांघी जाती हैं। अब हाफ सर्विस का मतलब भी समझा जा सकता है। अगर ग्राहक फुल सर्विस के लिए बोलता है तो उससे 25 सौ रुपये से लेकर चार हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। हाफ सर्विस का रेट 1,200 से लेकर 1,500 रुपये के बीच रहता है। हौजखास मार्केट में स्थित एक स्पा सेंटर के मालिक जावेद का कहना है, ये रेट इलाके वाइज तय होते हैं।

पॉश इलाकों में फुल सर्विस का रेट तीन-चार हजार रुपये के आसपास रहता है। वहीं पंजाबी बाग क्लब रोड की तरफ के इलाके में जाते हैं तो फुल सर्विस दो हजार रुपये में मिल जाती है। यमुना पार के इलाके जैसे लक्ष्मीनगर और उससे आगे मेट्रो लाइन के साथ खुले स्पा सेंटरों पर ये रेट 1,500 रुपये से दो हजार रुपये के बीच रहते हैं। किस लड़की या महिला से मसाज कराना है, स्पा सेंटर पर यह च्वाइस भी मिलती है।

एक स्पा सेंटर की रोज की कमाई 52 हजार 

दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में तैनात तीन दर्जन से ज्यादा स्पा सेंटरों पर की गई बातचीत के बाद गुलाबी धंधे की अंधी कमाई का ग्राफ सामने आया है। 900 स्पा सेंटरों पर दो तरह से एंट्री फीस वसूली जाती है। कुछ ऐसे सेंटर हैं जहां एंट्री फीस एक हजार रुपये है, तो अन्य पर यही फीस 1,500 रुपये है। एक सेंटर पर औसतन प्रतिदिन 15 से 20 ग्राहक आते हैं। वहीं प्रति सेंटर मसाज गर्ल्स की संख्या छह-सात रहती है।

एक मसाज गर्ल्स के पास प्रतिदिन औसतन तीन ग्राहक आते हैं। इस तरह से 900 सेंटरों पर रोजाना 18,900 ग्राहक पहुंचते हैं। एक ग्राहक स्पा रुम के भीतर यदि 2,500 रुपये खर्च कर रहा है, तो सभी सेंटरों को मिलाकर यह राशि साढ़े सात करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाती है।

इस गणना के हिसाब से एक सेंटर की रोजाना की कमाई लगभग 52 हजार रुपये होती है। स्पा सेंटर की एंट्री फीस और मसाज गर्ल्स को दी जाने वाली राशि को जोड़ें, तो यह गुलाबी धंधा रोजाना सात आठ करोड़ से बहुत ऊपर पहुंच जाता है।

स्पा सेंटर मालिक मसाज गर्ल्स से कर रहे वसूली! 

शादीपुर, पटेल नगर और रमेश नगर मेट्रो स्टेशन के निकट स्थित तीन स्पा सेंटरों पर काम कर रहीं मसाज गर्ल्स का कहना है, अब इस धंधे में हमारे ऊपर ज्यादा दबाव आने लगा है। पहले हमें 10-15 हजार रुपये प्रतिमाह सेलरी मिलती थी, अब वह पूरी तरह बंद हो गई है। सेंटर मालिक ने इसकी वजह यह बताई कि मसाज गर्ल्स रुम के भीतर अच्छी खासी कमाई कर लेती हैं। वे अब प्रति ग्राहक, मसाज गर्ल्स से हिस्सा लेने लगे हैं।

उन्हें लगता है कि मसाज रुम में ये गर्ल्स बहुत ज्यादा कमा लेती हैं। यदि कोई ग्राहक आने से पहले फोन कर एडवांस बुकिंग करता है, तो बाद में उस मसाज गर्ल से सेंटर मालिक पांच सौ रुपये ले लेता है।

अब दिल्ली में थाईलैंड, बैंकॉक और नेपाल की लड़कियां भी आने लगी हैं। विदेशी गर्ल्स को हिंदी नहीं आती, वे टूटी फूटी अंग्रेजी में रेट तय करती हैं। शुरु में हर ग्राहक का विदेशी गर्ल्स के प्रति खास आकर्षण होता है। 

पेटीएम से पेमेंट

जीएसटी के जानकार सीए राकेश गुप्ता का कहना है कि स्पा या मसाज सेंटर को जीएसटी से छूट नहीं मिली है। अगर इनका कलेक्शन बीस लाख रुपये से ज्यादा है, तो ही इन पर जीएसटी लगता है। सेंटर मालिक चालाक होते हैं, वे उक्त राशि से ज्यादा कलेक्शन नहीं दिखाते। अधिकांश फीस कैश में लेते हैं। रुम के अंदर जो सौदेबाजी होती है, वह भी कैश या पेटीएम से हो जाती है।

नहीं देते स्पा सेंटर्स की लिस्ट

एमसीडी के एक अधिकारी ने तो बहुत स्पष्टता से बताया कि आधे से ज्यादा सेंटर तो ऐसे हैं जो किसी अन्य धंधे के नाम पर दर्ज हैं। यह बात सभी को पता है, लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं होती। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल इस मामले में कई बार दिल्ली पुलिस, श्रम विभाग और सिविक एजेंसियों को लिख चुकी हैं। उन्होंने उक्त एजेंसियों से स्पा सेंटरों की सूची मांगी थी, वह भी नहीं दी गई। कितनों के पास लाइसेंस है, यह जानकारी भी किसी के पास नहीं है। बीते दिनों मालीवाल ने कई जगहों पर छापा मारकर दिल्ली पुलिस से स्पा सेंटर मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

पुलिस की बेचारगी!

पुलिस मुख्यालय के एक आला अधिकारी से जब इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, इन सेंटरों पर न तो नाबालिग है और न ही किसी को जबरदस्ती वहां धकेला गया है। ऐसा नहीं है कि पुलिस कुछ नहीं करती। हमारे बीट कांस्टेबल इन सेंटरों की जांच करते रहते हैं। वहां मसाज गर्ल्स कहती हैं कि हम बालिग हैं और अपनी मर्जी से यहां काम करती हैं। वे कानून का हवाला भी देती हैं कि स्पा कोई गलत काम नहीं है। अब बताएं कि पुलिस क्या करेगी।कोई ग्राहक या संस्था लिखित में इन सेंटरों पर कुछ गलत होने की शिकायत भी नहीं देती।

 

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