महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने जालना जिले के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया है। कार्रवाई मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किए जाने के बाद भड़की हिंसा की घटना के दो दिन बाद की गई। सूत्रों के मुताबिक, जालना जिले में शुक्रवार को भड़की हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने 40 लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को घोषणा की कि अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था (एडीजीपी) संजय सक्सेना लाठी चार्ज की घटना की जांच करेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराई जाएगी। इसके अलावा दो उपाधीक्षक रैंक के अधिकारियों का भी जालना से बाहर स्थानांतरण किया जा रहा है।
सीएम शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्रियों अशोक चव्हाण और उद्धव ठाकरे को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने सवाल किया कि चव्हाण मराठा आरक्षण पर बनी उप-समिति के ढाई साल तक अध्यक्ष थे, उस दौरान उन्होंने वास्तव में क्या किया? शिंदे ने ठाकरे का नाम लिए बिना कहा कि नवंबर 2019 से जून 2022 तक कौन मुख्यमंत्री था? उन्होंने कहा कि जिसने मराठा मोर्चा का मखौल उड़ाया, अब हमसे सवाल कर रहा है। शिंदे ने कहा कि मराठा आरक्षण के लिए अंतरवाली सराटी गांव में भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांदे-पाटिल के साथ बातचीत की गई और उनसे अनशन वापस लेने की अपील की गई है।
क्या था मामला?
बताया जा रहा है कि भूख हड़ताल पर बैठे एक व्यक्ति को शुक्रवार को वहां मौजूद लोगों द्वारा कथित तौर पर अस्पताल नहीं ले जाने देने के कारण पुलिस ने यह कार्रवाई की थी। इसके बाद अंतरवाली सराटी गांव में भीड़ हिंसक हो गई, जिसे तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे।
40 पुलिसकर्मियों समेत कई अन्य लोग घायल हुए थे
जानकारी के मुताबिक, घटना में 40 पुलिसकर्मियों समेत कई अन्य लोग घायल हो गए। इस दौरान 15 से अधिक बसों को आग लगा दी गई। हिंसा के सिलसिले में करीब 360 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। कई विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की, जबकि राज्य के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे की मांग की।