संसद के मानसून सत्र में एक सवाल कई सांसदों के लिए जी का जंजाल बन गया है। हालत ऐसी है कि सवाल पूछने वाले भी परेशान और सवाल करने वाले भी परेशान हैं। सवाल ही कुछ ऐसा है कि पिछले दो तीन सत्र में कोई न कोई सांसद पूछ ही बैठता है। सवाल है कि देश में अफवाह के चलते या सोशल मीडिया से भम्रित हुई भीड़ ने अभी तक कितने लोगों को पीट-पीट कर मार डाला। ऐसे कितने मामले सामने आए हैं। अभी तक करीब डेढ़ दर्जन सांसद यह सवाल पूछ चुके हैं। हर किसी को एक ही जवाब मिलता है कि सरकार ऐसे आंकड़े नहीं रखती। पुलिस तथा लोक व्यवस्था राज्यों का विषय है। अत: वे ही इसका जवाब दे सकते हैं।
सत्र के पहले ही दिन तीन सांसद यह सवाल पूछ बैठे
संसद सत्र के पहले ही दिन यानी 18 जुलाई को राज्यसभा के तीन सांसद विशंभर प्रसाद निषाद, छाया वर्मा औैर चौधरी सुखराम यादव ने यह सवाल पूछ लिया। इन्होंने गृह मंत्रालय से पूछा कि बच्चा चोरी के नाम पर भीड़ ने पीट-पीट कर कितने लोगों को मार डाला। पिछले तीन साल में किस राज्य में ऐसे कितने मामले सामने आए हैं।
उन घटनाओं का ब्यौरा क्या है। तीनों सांसद यहीं तक चुप नहीं रहे, उन्होंने इससे आगे भी पूछ डाला। क्या ऐसी घटनाओं के पीछे कोई साजिश है। गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ऐसा कोई डाटा नहीं रखती। पुलिस और कानून व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है। जान-माल की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की होती है।
सदन में थोड़ी देर बाद ही सांसद रिपुन बोरा और हुसैन दलवई ने भी यही सवाल दोहरा दिया। बताओ, भीड़ ने पीट-पीट कर कितने लोगों को मार डाला। इन्हें भी वही जवाब मिला, जो दूसरे सांसदों के सवालों पर दिया गया था। साथ में इन्हें गृह राज्यमंत्री ने यह भी बता दिया है कि हमने चार जुलाई को सभी राज्य सरकारों एवं संघ शासित प्रदेशों को एक परामर्शी पत्र जारी किया है कि वे ऐसी अफवाहों का पता लगायें। ऐसी घटनाओं पर नजर रखें और आरोपियों के साथ प्रभावशाली तरीके से निपटें। कानून हाथ में लेने वालों को दंडित करें।
अगले दिन राज्यसभा में ये सवाल गूंज उठे
24 जुलाई को 10 लोकसभा सांसद फिर से वही सवाल कर बैठे
लोकसभा सांसद सौगत राय ने पूछा, बताओ कितने बेगुनाह लोगों को भीड़ ने मार डाला। सांसद ओवैसी ने सवाल किया कि सरकार ने अभी तक कितने गौरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की है। जवाब वही मिला, हम ऐसा कोई रिकार्ड नहीं रखते हैं। दोपहर बाद लोकसभा सांसद मुथम सेटी श्रीनिवास राव अवंती, कौशलेंद्र कुमार, हरीश मीना, केसी वेणुगोपाल, मौसम नूर, सीएन जयदेवन और शिशिर कुमार अधिकारी ने पूछा, सोशल मीडिया की अफवाह के चलते, बच्चा उठाने की गलत खबर या दूसरी किसी तरह की निराधार सूचना की वजह से भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डालने के मामलों का ब्योरा दें। इन्होंने पूछा, कि सरकार इस मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में कोई उच्च स्तरीय पैनल गठित करने का विचार रखती है। जवाब मिला जी नहीं।
अगले दिन राज्यसभा में ये सवाल गूंज उठे
राज्यसभा सांसद डॉ. टी सुब्बारामी रेड्डी, अंबिका सोनी और डी राजा ने वही सवाल कर दिया। गृह राज्यमंत्री ने जवाब भी वही दे दिया जो दूसरे सांसदों को दिया गया था। कुछ देर बाद सांसद जोस. के मणि ने यही सवाल दोहरा दिया। इसके बाद सांसद जावेद अली खान ने पूछा कि सरकार के पास गोरक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की कोई जानकारी है, जवाब वही, जी कोई सूचना नहीं है। बता दें कि मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी इस मुद्दे पर अपना वक्तव्य दे चुके हैं। इसके अलावा अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी यह मुद्दा उठा था।
इंसान मर जाता है लेकिन जानकारी नहीं!
पशु मर जाता है, यह जानकारी है, मगर इंसान मरता है, उसकी कोई सूचना नहीं
सांसद जोस के मणि, हरीश मीना, हुसैन दलवई और कौशलेंद्र कुमार जैसे कई दूसरे सांसदों का कहना है कि सरकार के पास पशु कितने मरे हैं, यह जानकारी होती है, मगर भीड़ ने कितने लोगों को मारा है, इसका रिकार्ड नहीं है। मानवाधिकार उल्लंघन के मामले हैं, टी-प्वाइंट पर कितने सड़क हादसे हुए, यह जानकारी भी है।
ओवरस्पीड से होने वाले हादसे, वाहन फिसलने से सड़क पर कितने मरे, चोरी, स्नेचिंग, प्राकृतिक आपदा से हानि, लू से मौत, अवैध हथियार, महिलाओं और बच्चों से जुड़े सभी अपराध, ये डाटा मौजूद है, मगर भीड़ द्वारा लोगों को मारने का रिकार्ड नहीं रखा जाता।
इस बाबत एनसीआरबी के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि गृह मंत्रालय द्वारा जो रिकार्ड तैयार करने के लिए कहा जाता है, वे वही जानकारी राज्यों से मांगते हैं। अभी तक भीड़ द्वारा लोगों को मारने, जैसे मामलों की जानकारी रखने के लिए कोई निर्देश नहीं आया है।