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जरूरत पड़ने पर वापस पटरी पर लौट सकती हैं कई और ट्रेनें

Tue, 16 Jun 2020 07:28 AM IST
श्रीधर मिश्रा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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फाइल फोटो - फोटो : PTI
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लॉकडाउन में बंद ट्रेनों में से कुछ और ट्रेन पटरी पर लौट सकती हैं। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने यह संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर केंद्र सरकार से राज्य सरकारें स्पेशल ट्रेन के अलावा अन्य ट्रेन चलाने का अनुरोध करती हैं तो और अधिक ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर आवश्यक सेवाओं से जुड़े नागरिकों के लिए उपनगरीय सेवाएं शुरू की गई हैं। इसी तरह केंद्र सरकार से अगर अन्य राज्य भी ट्रेन चलाने को कहते हैं तो रेलवे इसमें पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के लिए भी राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखा गया है। आवश्यकता के अनुसार रेलवे मजदूरों के लिए भी ट्रेन चलाएगी।

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वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रेस कान्फ्रेंस में यादव ने बताया कि रेलवे ने 5231 कोच को कोविड केयर सेंटर के रूप में बदला है। राज्य सरकारों को अगर कोविड के मरीजों के लिए अस्पताल में बेड की कमी महसूस होती है तो इस कोच में मरीज को ऑब्जर्व करने के लिए रखा जा सकता है। वहीं, अगर स्थिति नहीं संभलती है तो मरीजों को ऑन व्हील से अस्पताल में भेजा जाएगा। इस कोच में सस्पेक्ट और कनफर्म मरीज के लिए अलग-अलग कोच है। इसके अलावा जिसकी जांच रिपोर्ट नहीं आई है उन्हें भी रखा जा सकता है और जो पॉजिटिव है उसे भी रखा जा सकता है। हर कोच में आठ केबिन बने हैं। जहां तक संभव होगा हर केबिन में एक मरीज रखेंगे। 

यादव के मुताबिक ये कोच कहां लगाए जाएंगे, इसको लेकर जगहों का चुनाव भी राज्य सरकारें ही करेंगी। रेलवे के पास 85 ऐसे स्टेशन हैं जहां रेलवे के अस्पताल हैं। यहां मेडिकल स्टाफ रेलवे का होगा। 135 स्टेशन पर राज्य सरकार मेडिकल स्टाफ देगी। इसकी निगरानी राज्य सरकार का चीफ मेडिकल ऑफिसर करेगा। कोविड केयर कोच सेंटर की मैपिंग की जाएगी और नजदीकी अस्पताल से लिंक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक तेलंगाना, यूपी और दिल्ली ने इस तरह के कोच की मांग की है। 40 कोच दिल्ली के शकूर बस्ती शेड में पहुंचाए गए हैं। यादव ने बताया कि कोच में टेंपरेचर कंट्रोल का इंतजाम भी किया जाएगा, क्योंकि कोविड केयर कोच नॉन एसी है।
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आवश्यक सेवाओं के लिए ट्रेन चली तो

रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए अभी तक 4450 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चली हैं। इनसे 60 लाख से ज्यादा श्रमिक गृह प्रदेश पहुंचे हैं। 26 मई तक औसतन प्रतिदिन 250 ट्रेनें चली हैं, इसके बाद इनकी संख्या घट गई। 3 जून को 171 ट्रेनें राज्य सरकारों के अनुरोध पर चलीं। वहीं, 14 जून तक 222 ट्रेनों को रेलवे ने चलाया। इस मामले में सभी राज्य सरकारों को फिर से पत्र लिखा गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि जब तक जरूरत होगी, श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई जाएंगी।

ट्रेन चली तो स्पेशल आईकार्ड जारी होगा

आवश्यक सुविधा के लिए 230 स्पेशल ट्रेनों के अलावा अगर और ट्रेनें चलती हैं तो पहचान पत्र से ही सफर करने की अनुमति मिलेगी। ई-पास जारी किया जाएगा। ट्रेन में आमतौर पर 1200 यात्री सफर करते हैं, लेकिन नई ट्रेनों में 700 यात्री सफर करेंगे।

रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि फीडबैक के अनुसार इमरजेंसी में स्पेशल ट्रेन से लोग यात्रा कर रहे हैं। इसके अलावा आर्थिक एक्टिविटी भी है। इन ट्रेनों की वेटिंग लिस्ट को मॉनीटर किया जा रहा है। जून, जुलाई, अगस्त में वेटिंग नहीं है।  

नौकरी के लिए आश्वस्त किया

बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि असिस्टेंट लोको पॉयलट और टेक्नीशियन के पद जल्द ही भरे जाएंगे। एप्वाइंटमेंट लेटर सभी चयनित लोगों को भेजा जाएगा। असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन के पद के लिए 48 लाख आवेदन मिले थे। इसके लिए 64,371 वेकेंसी थीं। 2030 को ध्यान में रखकर वेकेंसी निकाली गई हैं। सभी वेकेंसी भरी जाएंगी। एप्वाइंटमेंट के साथ ट्रेनिंग देना होता है इसी वजह से देरी हो रही है। ट्रेनिंग ऑनलाइन के साथ फील्ड में भी दी जाएगी। एनटीपीसी (नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटगरी) में 35,200 वेकेंसी हैं। इसके लिए 1.60 लाख आवेदन मिले हैं। आवेदन की स्क्रूटनी की जा रही है।

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