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Politics: पार्टी छोड़ने को तैयार डेढ़ दर्जन नामधारी नेता, इन्हें बनाए रखने को क्या कांग्रेस के पास कोई प्लान?

सार

कांग्रेस के करीब डेढ़ दर्जन नामधारी नेताओं के बारे में कहा जा रहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं से हरी झंडी मिलने के बाद वह पार्टी को अलविदा कह देंगे। कांग्रेस को छोड़ने की संभावना में अभी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे हैं।
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Mallikarjun Kharge, Sonia Gandhi - फोटो : Social Media
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विस्तार
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद भवन में चाय के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा था कि आखिर कब तक भाजपा उनके और विपक्ष के नेताओं को डरा-धमकाकर तोड़ती तथा भाजपा में जोड़ती रहेगी? कब भाजपा की भूख शांत होगी? खरगे को तब उनकी चिंता का कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला था। आज खरगे दिल्ली में एक लंच में शामिल होने पहुंचे। उनसे उनकी पार्टी के एक कद्दावर नेता, पूर्व मुख्यमंत्री के पार्टी छोड़ने और भाजपा में जाने पर सवाल पूछा गया। खरगे की परेशानी उनके चेहरे पर साफ नजर आई। बोले- भाई, अभी माहौल मत खराब करो? लेकिन बड़ा सवाल है कि कांग्रेस के पास अपनी पार्टी को छोड़ने के लिए तैयार बैठे डेढ़ दर्जन नामधारी नेताओं को रोकने के लिए कौन सा प्लान है?

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कांग्रेस के करीब डेढ़ दर्जन नामधारी नेताओं के बारे में कहा जा रहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेताओं से हरी झंडी मिलने के बाद वह पार्टी को अलविदा कह देंगे। कांग्रेस को छोड़ने की संभावना में अभी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ तथा कुछ विधायक हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण, पूर्व केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी ने पिछले दिनों में कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। खबर है कि पार्टी को छोड़ने की कतार में केरल के एक सांसद, पंजाब के एक सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री का नाम है। हिमाचल के पूर्व केंद्रीय मंत्री भी कांग्रेस से नाराज हैं। उपयुक्त समय और प्रस्ताव के इंतजार में बताए जाते हैं। राजस्थान के एक बड़े कांग्रेस नेता भी पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया से संपर्क कर चुके हैं। केंद्रीय मंत्री पीयुष गोयल ने राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी को तोड़कर भाजपा को बड़ा तोहफा दिया है। खबर है कि पीयुष गोयल के संपर्क में कांग्रेस दो-तीन बड़े नेता हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दक्षिण भारत को लेकर अधिक संवेदनशील हैं। बताते हैं दक्षिण भारत में भी आपरेशन लोटस की जमीन तैयार की जा रही है। खासकर तमिलनाडु और केरल में भाजपा खाता खोलना चाहती है। उसे आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के सहारे खाता खोलना है।

कांग्रेस के पास अपने नेताओं को रोकने का कौन सा प्लान है?
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि जाने वाले को भला कौन रोक सकता है? पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि जो कांग्रेस छोड़कर जा रहे हैं, उन्हें या तो प्रवर्तन निदेशालय आदि के माध्यम डराया, धमकाया जा रहा है और या फिर उनके पास कांग्रेस पार्टी को देने के लिए कुछ नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने कांग्रेस को छोड़ा है, सही माने में वह हताश और निराश लोग हैं। सूत्र का कहना है कि जो कांग्रेस में रहकर नेता बना है, उसे पार्टी ने नेता बनाया। बहुत कुछ दिया और जब उन्हें कुछ मिलने की उम्मीद कमजोर दिखने लगी तो अवसर तलाश रहे हैं। मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ नेता ने भी कहा कि जो चुनाव लड़कर जीत नहीं सकते या लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, वही अवसर की तलाश में लगे हैं।
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मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी कहते हैं कि जिन लोगों ने कांग्रेस को छोड़ा है, उनमें पांच-छह प्रतिशत को छोड़ दें तो किसी का भी राजनीतिक भविष्य परवान नहीं चढ़ पाया। हालांकि जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह दोनों को विश्वास है कि कमलनाथ कांग्रेस को नहीं छोड़ेंगे। जीतू पटवारी कहते हैं कि कमलनाथ ने तो उन्हें भरोसा दिया है और इस खबर को अफवाह बताया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने 60 से अधिक नेताओं की सूची जारी कर दी है। बताया है कि इनमें से 55 के राजनीतिक भविष्य तो बाकायदा दांव पर लग गए। इस सवाल का कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणु गोपाल से भी कोई जवाब नहीं मिल पाया।

कांग्रेस की समस्या: किस-किस को रोकें और हर कोई साथ छोड़ने के बाद करता है राहुल गांधी की आलोचना
भाजपा के निशाने पर कांग्रेस है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफलता पाने के लक्ष्य में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को कमजोर करते रहना है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को हमेशा अपने राजनीतिक उद्देश्य का पता रहता है। इसे साधने के लिए भाजपा ने पहले कांग्रेस के युवा नेताओं को अवसर दिया और इसमें राहुल गांधी के साथ राजनीति में तैयार हुए तमाम युवा नेता(ज्योतिरादित्य, जितिन प्रसाद, आरपीएन सिंह, मिलिंद देवड़ा समेत अन्य) कांग्रेस को छोड़कर चले गए। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि इसी तरह से तमाम बड़े नेता चले गए। उत्तर प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो भी गया, सबने यही बयान दिया कि उनका कांग्रेस में दम घुट रहा है। कई राहुल गांधी और कांग्रेस कल्चर को इसके लिए निशाने पर लिया। सूत्र का कहना है कि इस समय कांग्रेस पार्टी सभी नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी के अलावा कुछ और देने की स्थिति में कम है। इसलिए सब कहने या मनाने भर से रुकने वाले नहीं है।

लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए खुद को नहीं तैयार कर पा रहे हैं नेता
कांग्रेस के नेताओं में हताशा और निराशा दोनों बढ़ रही है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी रायबरेली जैसी सीट से चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं थीं। सूत्र बताते हैं कि वह हिमाचल से राज्य सभा में आने को उत्सुक थीं। तर्क था कि वह लोकसभा के तमाम प्रत्याशियों और पार्टी के लिए खुलकर प्रचार कर पाएंगी। लेकिन उनके लिए कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जमीन तैयार की और उन्हें मनाया भी। इसी तरह से कांग्रेस पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेताओं से लोकसभा चुनाव 2024 में उनके पसंद की संसदीय सीट के बारे में जानने चाहा तो सूत्र बताते हैं कि 80 प्रतिशत से अधिक ने कोई खास रुचि नहीं ली है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में कांग्रेस भले 20 सीटें मांग रही हों, लेकिन उसे ठोस 20 प्रत्याशी ढूंढने में खासी दिक्कत आनी तय है। समाजवादी पार्टी के नेता संजय लाठर कहते हैं कि 20 सीटों पर लड़ने से क्या होगा? 20 जीताऊ और टक्कर देने वाले उम्मीदवार कांग्रेस को गिनाने चाहिए।

विपक्ष की दशा पर अरविंद केजरीवाल का कटाक्ष
कांग्रेस के नेता अभिषेक मनु सिंघवी के घर दावत थी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आए थे। अनौपचारिक बातचीत में केजरीवाल ने जमकर भाजपा पर तंज कसा। केजरीवाल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय और खासकर पीएमएलए की धारा 45 हटा दी जाए तो भाजपा के आधे से अधिक नेता पार्टी छोड़ देंगे। यहां तक कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नई पार्टी बना लेंगे। केजरीवाल का यह तंज कांग्रेस के नेताओं को भी हंसने पर मजबूर कर रहा था। दरअसल केजरीवाल ने इस कटाक्ष के बहाने भाजपा पर राजनेताओं को डराने, धमकाने, पार्टियों को तोड़ने का आरोप लगा दिया।

जब खरगे ने प्रधानमंत्री से पूछा तो उन्हें भी नहीं मिला सकारात्मक जवाब
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद सार्वजनिक किया है। संसद में चाय पर चार्च के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा था कि भाजपा की खुराक कितनी है? इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने खरगे से कहा कि अगर लोग भाजपा से जुड़ना चाह रहे हैं तो इसमें वह क्या कर सकते हैं। खरगे ने प्रधानमंत्री को फिर बताया कि भाजपा के लोग नेताओं-मंत्रियों को डरा धमका कर भाजपा में शामिल करवा रहे हैं? इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग सरकार का कामकाज देखकर भाजपा से जुड़ना चाहते तो इसमें वह क्या कर सकते हैं। खरगे और प्रधानमंत्री के इस संवाद में कांग्रेस अध्यक्ष की लाचारगी और बेचारगी दोनों साफ झलक रही है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि कांग्रेस के पास अपने नेताओं की भगदड़ को रोकने का न तो कोई प्लान है और न ही उसे कोई ठोस तरकीब सूझ रही है l

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