केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय पर हमेशा ये आरोप लगते रहे हैं कि वे देश की सत्ताधारी पार्टी के लिए काम करती रही हैं। विपक्ष ने उनकी जांच को हमेशा राजनीति से प्रेरित बताया है और इसके जरिये सत्तारूढ़ दलों पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है। लेकिन संभवतया यह पहली बार हो रहा है कि अब विपक्षी दलों ने भी सीबीआई-ईडी जांच को भुनाना सीख लिया है। 17 अक्तूबर को मनीष सिसोदिया की सीबीआई से होने वाली पूछताछ के पहले आम आदमी पार्टी ने जो प्रदर्शन किया है, इसे सीधा गुजरात चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके पहले राहुल गांधी से ईडी की पूछताछ के पहले कांग्रेस ने भी इसी तरह का विरोध प्रदर्शन किया था।
भाजपा नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि यह भ्रष्टाचार को ‘ग्लैमराइज’ करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया पर शराब घोटाले में गंभीर आरोप हैं और वे इस मामले में आरोपी नंबर वन हैं। दिल्ली सरकार को इस बात के जवाब देने होंगे कि नियमों के विरुद्ध जाकर उन्होंने शराब व्यवसायियों को अनुचित लाभ कैसे पहुंचाया। लेकिन जिस प्रकार पूछताछ के पहले आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन किया, वह उनके अपराध को छिपाने की कोशिश थी।
दिल्ली कांग्रेस उपाध्यक्ष मुदित अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी बंद कर चुकी थी। पहली जांच में ही उसे इस मामले में कोई घोटाला नहीं दिखाई पड़ा था। लेकिन केवल राहुल गांधी और सोनिया गांधी की छवि खराब करने के लिए सत्तारूढ़ दल ने इस मामले को दोबारा खोला। यह साबित करता है कि भाजपा इनका राजनीतिक इस्तेमाल कर रही थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर हमला राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश था, जबकि इस जांच के विरोध में किया गया उनकी पार्टी का प्रदर्शन केवल इस मामले को जनता के संज्ञान में लाने की कोशिश थी।
मुदित अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली की शराब पॉलिसी में व्यापारियों का कमीशन दो फीसदी से बढाकर 12 फीसदी किया गया। इसी प्रकार अनुचित तरीके से कम्पनियों को 144 करोड़ रुपये की राहत दी गई। ये तथ्य इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि केजरीवाल सरकार ने शराब घोटाले में बड़ा भ्रष्टाचार किया है। कांग्रेस नेता ने केजरीवाल सरकार पर हमला करते हुए कहा कि जिन्होंने महात्मा गांधी की फोटो अपने कार्यालयों से हटा दिया, अब भ्रष्टाचार में घिरने के बाद उन्हीं के नाम पर बचने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी यह कोशिश सफल नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि इन दो मामलों से साफ़ हो जाता है कि इन जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव होता है और देश के कई विपक्षी दलों के नेताओं पर लगातार हो रही कार्रवाई से इस बात का शक विश्वास में बदल जाता है कि एजेंसियों का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन केवल इसके नाम पर शराब घोटाले जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में बचा नहीं जा सकता।