'मणिपुर के जिस वीडियो को देखकर आज दिल्ली से लेकर समूचे देश में हंगामा मच गया है, उसे आप लोगों तक पहुंचने में 80 दिन लग गए। जो वीडियो में दिखा है ठीक उसी तरह की बर्बरता मणिपुर में हुई है। आप अंदाजा लगाइए हम लोग कैसे यहां जी रहे हैं। हालात अभी भी ऐसे हैं कि हम लोग अपने घरों से लेकर अपनी मां, बहन और बहू-बेटियों को बचाते हुए फिर रहे हैं। लेकिन न सरकार हमारी सुन रही है, न ही कोई अन्य जिम्मेदार लोग। अभी भी बहुत बुरे हालातों में हम लोग रह रहे हैं। इससे ज्यादा नर्क की स्थिति और कुछ नहीं हो सकती।' अमर उजाला डॉट कॉम से मणिपुर के लोगों ने वहां के वायरल वीडियो पर फोन से बातचीत में नाराजगी जताते हुए कहा कि जो वीडियो में दिखा है, उससे कहीं ज्यादा बर्बरता मणिपुर में हुई है।
यह भी पढ़ें: Manipur: मणिपुर की घटना पर पीएम मोदी के गुस्से से 12 घंटे पहले क्या हुआ था, किसने किए थे वे दो ट्वीट?
अंदाजा लगाइए इन 80 दिनों में क्या हुआ होगा
मणिपुर के रहने वाले खमेगा पजोहबन कहते हैं कि आपके पास जो वीडियो पहुंची है, वह तो 80 दिन बाद पहुंची है। आप सोचिए 4 मई से लेकर अब तक क्या तकलीफ हम लोग झेल रहे हैं। जब वीडियो समूचे देश और दुनिया में वायरल हो गई, तो हंगामा मच गया लेकिन क्या वीडियो वायरल होने से और वीडियो के बनाए जाने के बीच के दौर को किसी ने महसूस किया है। वह कहते हैं कि मई की शुरुआत में शुरू हुआ वीभत्सता का यह खेल मणिपुर के अलग-अलग इलाकों में खेला जाता रहा। उनका कहना है ऐसा नहीं है कि इस तरीके की घटनाओं के बारे में पुलिस को सूचना नहीं दी गई। नाराजगी जताते हुए वह कहते हैं कि मणिपुर में हो रहे अत्याचार की जानकारी सभी जिम्मेदारों को हो रही थी। बावजूद इसके कोई खुलकर मदद नहीं कर रहा था। वो कहते हैं कि इन 80 दिनों में हम लोग अपने घरों में दुबके बैठे हैं।
हर रोज बचाते हैं अपनी बहन, बहू-बेटियों को
खमेगा कहते हैं मणिपुर में जो आग लगी है वह भयावहता और क्रूरता की सभी हदों को पार कर रही है। उनका कहना है कि हालात अभी भी मणिपुर में सामान्य नहीं हुए हैं। यहां पर दो वक्त के खाने के साथ-साथ अपने घरों को बचाने और घरों में रहने वाली महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए हर वक्त मुस्तैद रहना पड़ रहा है। वह कहते हैं कि मणिपुर में पहले भी ऐसे विरोध प्रदर्शन हुए हैं। जिस तरीके की घटना इस बार यहां पर हुई वह शर्मसार करने वाली हैं। वह बताते हैं कि स्थानीय लोगों की प्राथमिकता में अब अपने घर परिवार को बचा कर रोजी-रोटी चलाना ही प्राथमिकता में बचा है। वह कहते हैं कि अब बात यहां पर अब कुकी, नागा और मैतेई से ज्यादा मणिपुर की अस्मिता का है। उनका कहना है जो हालात इस वक्त मणिपुर में बन गए हैं, वह लचर कानून व्यवस्था और निरंकुश शासन की वजह से ही बने हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस वीडियो के आने के बाद ही सही बड़े स्तर पर जांच कराएं और मणिपुर के लोगों के दर्द को समझे।
लोगों ने कहा कि जिसका वीडियो देखा उसका गैंगरेप हुआ
मणिपुर के ट्राइबल्स लीडर ऑर्गनाइजेशन से जुड़े एरहोन जुकी कहते हैं कि कि जो वीडियो आप देख रहे हैं उसमें एक 21 साल की नग्न महिला के साथ गैंगरेप भी किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन दो महिलाओं की वीडियो इस वक्त पूरे देश और दुनिया में हमें शर्मसार कर रही हैं, दरअसल उन दोनों महिलाओं का न सिर्फ गैंगरेप किया गया, बल्कि उनके घर वालों के सामने उनकी इज्जत लूटी गई। वह कहते हैं कि यह तो वीडियो बन गया तो दिख गया। लेकिन ऐसे ना जाने कितने उदाहरण हैं, जो बगैर वीडियो के ही लोगों की आंखों में तैर कर दहशत पैदा कर रहे हैं।
डेढ़ महीने पहले थाने में भी दर्ज हुई गैंगरेप की रिपोर्ट
इस घटना के बारे में बात करते हुए स्थानीय लोगों का कहना है मणिपुर के कंगपोकपी में यह हैवानियत हुई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक परिवार के पांच लोगों को विद्रोह करने वाले एक समुदाय ने दौड़ा लिया था। उसमें तीन महिलाएं और दो पुरुष भी थे। तीन महिलाओं में से दो महिलाओं के साथ जो शर्मसार करने वाली घटना इन अताताइयों ने की, वहीं समूचे देश और दुनिया में इस वक्त लोगों को नजरें झुकाने पर मजबूर कर रही हैं। ट्राइबल एसोसिएशन से जुड़े जुकी कहते हैं कि इस घटना की एफआईआर कांगपोकपी के सैकुल पुलिस स्टेशन में भी दर्ज कराई गई थी। लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई थी। वह कहते हैं कि हैवानियत सिर्फ यही तक नहीं रुके बल्कि गैंगरेप जैसी वारदात भी की गई। उनका कहना है कि पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई शिकायत में इस बात का भी जिक्र किया गया है।