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Manipur Violence Case: विदेशी साजिश के आरोपी ने मांगी जमानत; एनआईए ने किया विरोध

Sat, 28 Oct 2023 04:50 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और वहां आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए मणिपुर राज्य में मौजूदा जातीय अशांति का फायदा उठाने के लिए उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के म्यांमार स्थित नेतृत्व द्वारा रची गई अंतरराष्ट्रीय साजिश में शामिल था।
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NIA की टीम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मणिपुर हिंसा के पीछे विदेशी साजिश में शामिल होने के एक आरोपी ने जमानत की मांग की है। जिस पर शनिवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन गुप्ता के सामने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसकी इस याचिका का विरोध किया। एनआईए ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी  मोइरांगथेम आनंद सिंह का प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ाव था। उसे चल रहे संघर्ष से प्रभावित क्षेत्र में अपने सहयोगियों के साथ अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया था।

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एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और वहां आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए मणिपुर राज्य में मौजूदा जातीय अशांति का फायदा उठाने के लिए उत्तर पूर्वी भारतीय राज्यों में सक्रिय आतंकवादी संगठनों के म्यांमार स्थित नेतृत्व द्वारा रची गई अंतरराष्ट्रीय साजिश में शामिल था। एजेंसी ने यह भी कहा कि अगर आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया, तो इससे इस मामले में चल रही जांच में मुश्किल पैदा होगी। जैसा की आरोपी का इतिहास है उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इस बात की बहुत संभावना है कि वह फिर से इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होगा, जिससे राज्य में वर्तमान सुरक्षा स्थिति खराब हो जाएगी।

फिलहाल, इस मामले में अब अगली सुनवाई आठ नवंबर को होगी। तब अदालत आरोपी की अर्जी पर दलीलें सुनेगी। बता दें कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को नई दिल्ली लाया गया और 23 सितंबर को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
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बता दें कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद मणिपुर में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस जातीय हिंसा में 180 से अधिक लोग मारे गए हैं और कई सौ लोग घायल हुए हैं। इस बीच, 26 सितंबर को दो लापता युवकों के शवों की तस्वीरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के साथ छात्रों की झड़प हुई, जिसके बाद मोबाइल इंटरनेट पर फिर से पाबंदी लगानी पड़ी थी। 

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