पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थौनाओजम बृंदा
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मणिपुर संकट पर कथित टिप्पणी को लेकर नाराज महिलाओं के एक समूह ने सोमवार को यहां याइसकुल में पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थौनाओजम बृंदा के आवास पर तोड़फोड़ की। जिस समय बृंदा के घर पर हमला किया गया, उस समय वह घर पर नहीं थीं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बिष्णुपुर जिले के तोरबुंग से एक निगरानी समूह मीरा पैबिस के सदस्यों ने कुछ फर्नीचर और खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए। महिलाएं बृंदा के आवास पर आईं और तीन मई को तोरबुंग में हुई हिंसा के संबंध में की गई उनकी कथित टिप्पणी पर स्पष्टीकरण की मांग की।
दरअसल, सोशल मीडिया पर ऑडियो क्लिप वायरल हो गई थी। जिसमें बृंदा ने कथित तौर पर दावा किया कि इंफाल घाटी स्थित एक समूह के सदस्यों ने तीन मई को तोरबुंग में घरों में आग लगा दी थी। जिसके बाद राज्य में हिंसा भड़क उठी थी।
रैपिड एक्शन फोर्स के कर्मियों सहित सुरक्षा बल उनके घर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में किया। बृंदा जून 2018 में एक हाई-प्रोफाइल ड्रग बरामदगी के सिलसिले में सुर्खियों में आई थीं। जिसके बाद चंदेल स्वायत्त जिला परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष और सात अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने 2022 में जद (यू) के टिकट पर राज्य विधानसभा चुनाव भी लड़ा था। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पूर्व पुलिस अधिकारी के घर आई मीरा पैबिस की एक सदस्य ने पत्रकारों से कहा, 'तीन मई को जब हिंसा भड़की थी तब थौनाओजम कभी तोरबुंग नहीं गईं। उन्होंने उन लोगों की पीड़ाओं और भावनाओं की पूरी तरह से उपेक्षा की, जिन्होंने अपने घरों और संपत्ति को खो दिया। प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि चुराचांदपुर जिले की एक सशस्त्र भीड़ ने हिंसा को अंजाम दिया।
मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' के आयोजन के बाद तीन मई को हिंसा भड़की थी। जिसके बाद से 180 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। मणिपुर की आबादी में मैतई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 फीसदी है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जबकि आदिवासी (जिनमें नगा और कुकी शामिल हैं) 40 फीसदी हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।