मणिपुर में विरोध प्रदर्शनों में प्रतिबंधित गुटों के उग्रवादियों के सक्रिय होने को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है। अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में सैन्य अधिकारी पर गोली चलाने वाली भीड़ में प्रतिबंधित गुटों के उग्रवादी भी शामिल थे।
मणिपुर में लंबे समय से जारी हिंसा के बीच एक चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अधिकारियों ने दावा किया है कि राज्य में निष्क्रिय आतंकी समूह फिर से सक्रिय हो रहे हैं। इसके कारण तनाव बढ़ गया है। साथ ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने अशांत मणिपुर राज्य में तनाव फैलाने के लिए किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ में आतंकवादियों के शामिल होने की संभावना के बारे में भी चेतावनी दी है।
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अधिकारियों की यह चेतावनी बीते सप्ताह सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल के घायल होने के बाद आई है। लेफ्टिनेंट कर्नल मीरा पैबिस (महिला रक्षक) सहित भीड़ के गतिरोध के दौरान घायल हो गए थे। इस भीड़ ने टेंगनौपाल जिले के पलेल के पास मोलनोई गांव में आदिवासियों पर हमला करने की कोशिश की थी। हालांकि सेना और असम राइफल्स ने उन्हें रोक दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंधित समूहों यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के आतंकवादी कथित तौर पर इस भीड़ में शामिल थे।
अधिकारियों ने कहा कि घटना की जांच से सुरक्षा एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंचीं कि प्रतिबंधित गुटों के उग्रवादी इस भीड़ का हिस्सा थे। एजेंसियां पिछले कुछ हफ्तों से राज्य में यूएनएलएफ, पीएलए, कांगलेई यावोल कनबा लूप (केवाईकेएल) और पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) जैसे निष्क्रिय प्रतिबंधित गुटों के फिर से सक्रिय होने के बारे में चेतावनी दे रहे थे।
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अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में यूएनएलएफ के पास कैडर की संख्या 330 है। इसके अलावा पीएलए के पास 300 और केवाईकेएल के पास 25 कैडर हैं, जो बहुसंख्यक समुदाय के समूहों के अंदर सक्रिय हैं। इन प्रतिबंधित गुटों के कैडरों को मिल रहा जबरदस्त समर्थन 24 जून को उस वक्त दिखा जब सेना और असम राइफल्स ने खुफिया जानकारी के आधार पर पूर्वी इंफाल में केवाईकेएल के 12 सदस्यों को पकड़ा। इसमें स्वयंभू लेफ्टिनेंट कर्नल मोइरांगथेम तम्बा उर्फ उत्तम भी शामिल था। उत्तम 2015 में 6 डोगरा रेजिमेंट पर घात लगाकर किए गए हमले के मास्टरमाइंड में से एक था। इस हमले में सेना के 18 जवान मारे गए थे। यूएनएलएफ अतीत में बड़े पैमाने पर ठेकेदारों और व्यापारियों को निशाना बनाकर जबरन वसूली में शामिल रहा है।