मणिपुर कांग्रेस ने पिछले चार वर्षों से स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) चुनाव न कराने के लिए राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने मणिपुर की भाजपा सरकार को पहाड़ी विरोधी और जनजातीय विरोधी होने का आरोप लगाया। मणिपुर में छह स्वायत्त जिला परिषद हैं। कांग्रेस का कहना है कि साल 2015 में कांग्रेस सरकार में ही एडीसी चुनाव हुए थे, जिनका कार्यकाल साल 2020 में ही समाप्त हो चुका है।
मणिपुर कांग्रेस ने लगाए आरोप
मणिपुर कांग्रेस के अध्यक्ष केशम मेघचंद्र ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि 'भाजपा सरकार पहाड़ी लोगों और आदिवासियों के खिलाफ है, क्योंकि इस भाजपा सरकार ने जानबूझकर पिछले 4 वर्षों से एडीसी चुनाव नहीं कराने का फैसला किया है।' केशम ने मणिपुर विधानसभा के तहत आने वाली पहाड़ी क्षेत्र समिति (एचएसी) के 14 अक्टूबर के प्रस्ताव पर भी निशाना साधा। इस प्रस्ताव में कहा गया कि समिति ने गहन चर्चा के बाद सर्वसम्मति से 'मणिपुर सरकार को लंबे समय से लंबित स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) के चुनाव जल्द से जल्द कराने की सिफारिश की है।'
पहाड़ी क्षेत्र समिति में होंगे 20 सदस्य
समिति के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि एडीसी चुनाव होने तक एडीसी के प्रशासन को चलाने के लिए, प्रत्येक एडीसी के लिए 20 सदस्यों वाली एक समिति गठित की जाएगी, जिनमें से 18 पूर्व एडीसी सदस्यों/स्थानीय स्वशासन के विशेषज्ञों/प्रतिष्ठित व्यक्तियों/बुद्धिजीवियों और जिले के दो सरकार मनोनीत सदस्य चुने जाएंगे। कांग्रेस नेता ने इस प्रस्ताव को असंवैधानिक, अवैध करार दिया और दावा किया कि पहाड़ी क्षेत्र समिति के पास ऐसा कोई प्रस्ताव पारित करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
मणिपुर में 2017 में भाजपा सरकार सत्ता में आई थी। मणिपुर में साल 2020 में एडीसी चुनाव होने थे, लेकिन ये अभी तक नहीं हो पाए हैं। केशम मेघचंद्र ने कहा कि 'मणिपुर के पहाड़ी लोगों के व्यापक हित में भाजपा सरकार द्वारा अवैध तरीकों से एडीसी के कामकाज की अस्थायी व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।' मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से एडीसी चुनाव नहीं कराकर वित्तीय हस्तांतरण, केंद्रीय अनुदान सहायता, केंद्रीय वित्त पोषण, एमजीएनआरईजीएस, एडीसी से संबंधित केंद्रीय योजनाएं और वित्त आयोग की मदद से राज्य के पहाड़ी लोगों को वंचित किया जा रहा है।