फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mani Shankar Aiyar: 'मैं पैड बांधकर तैयार हूं, बुलाया गया तो बल्लेबाजी भी करूंगा', राजनीतिक करियर पर मणिशंकर

Mon, 21 Aug 2023 07:10 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

अय्यर की आत्मकथा पुस्तक "मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक - द फर्स्ट फिफ्टी इयर्स (1941-1991)" सोमवार को बिक्री के लिए बाजार में आई है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि छात्र जीवन के बाद अगले 50-60 वर्षों में उन्होंने उस ‘कोकोनट इंडियन’ वाली खुद की धारणा को तोड़ दिया।
विज्ञापन
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने उन्हें अभिजात्यवादी और अंग्रेजी सोच वाला व्यक्ति कहने वाले आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि वह खुद "मैकाले की औलाद" होने पर खुशी महसूस करते हैं, लेकिन उन्हें अपने भारतीय होने पर भी बहुत गर्व है। अय्यर ने अपने संस्मरण में इस बात का उल्लेख किया कि कैंब्रिज विश्वविद्यालय में छात्र जीवन के दौरान उन्होंने खुद को ‘कोकोनट इंडियन’ (ऊपर से भारतीय और भीतर से अंग्रेज) उपनाम दिया था।

विज्ञापन


अय्यर की आत्मकथा पुस्तक "मेमोयर्स ऑफ ए मेवरिक - द फर्स्ट फिफ्टी इयर्स (1941-1991)" सोमवार को बिक्री के लिए बाजार में आई है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि छात्र जीवन के बाद अगले 50-60 वर्षों में उन्होंने उस ‘कोकोनट इंडियन’ वाली खुद की धारणा को तोड़ दिया। उन्होंने राजनीति में अपनी वर्तमान स्थिति का वर्णन करने के लिए क्रिकेट की एक शब्दावली का उपयोग किया।

मैं पैड बांधकर तैयार हूं, बुलाया गया तो बल्लेबाजी भी करूंगा: मणिशंकर
अय्यर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, मैंने अच्छी पारी खेली थी, लेकिन अब मुझे पवेलियन वापस भेज दिया गया है। मैं पैड बांधकर तैयार हूं और अगर मुझे बल्लेबाजी के लिए बुलाया जाता है तो मैं बल्लेबाजी करने के लिए भी तैयार हूं। 
विज्ञापन


अय्यर को राजीव गांधी का ‘मणि फ्राइडे’ कहा जाता था
जगरनॉट बुक्स’ द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक अय्यर की ‘वेल्हम’ प्रिपरेटरी स्कूल से लेकर ‘दून स्कूल’ और फिर ‘सेंट स्टीफंस कॉलेज’ और ‘कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय’ तक, और महत्वपूर्ण कार्यभार संभालने वाले एक शीर्ष राजनयिक से लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रमुख सहयोगी बनने तक की यात्रा का वर्णन करती है। उन्हें राजीव गांधी का ‘मणि फ्राइडे’ कहा जाता था। अय्यर 1985 से1989 तक राजीव गांधी के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का हिस्सा थे।

अय्यर ने कहा, मैंने किताब में लिखा है कि जिस तरह की स्कूली शिक्षा मैंने हासिल की, उसका नतीजा यह था कि जब मैं कैम्ब्रिज गया तो मुझे यह महसूस हुआ कि भारत की तुलना में कैम्ब्रिज कहीं ज्यादा अपने घर जैसा लगता है। उस पर रोमांचित होने के बजाय, मैं हैरान रह गया और मैंने कहा कि यह मुझे 'कोकोनट इंडियन' बनाता है यानी ऊपर से भूरा, लेकिन अंदर से सफेद।

यूपीए-1 में थे मंत्री
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रहे अय्यर ने कहा, ‘मैंने स्कूल में जो कुछ भी आत्मसात किया, उसे बरकरार रखा है...भारत का सभ्यतागत इतिहास अवशोषण, आत्मसात और अंत में संश्लेषण का है। इसलिए, मुझे बहुत खुशी है कि मैं 'मैकाले की औलाद' हूं, लेकिन साथ ही मैं केवल यही नहीं हूं, बल्कि मुझे अपने भारतीय होने पर भी बेहद गर्व है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, मुझे बहुत गर्व है कि मैं भारतीय हूं और मेरे भारत के साथ अब क्या किया जा रहा है, यह देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा है।

लॉर्ड थॉमस बबिंग्टन मैकाले को भारत में अंग्रेजी शिक्षा की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। इस पुस्तक में 82 वर्षीय अय्यर ने अपने बारे में और राजीव गांधी के साथ अपने संबंधों के बारे में कई गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास किया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री के साथ उनके संबंधों के बारे में अधिक विस्तृत और गहन जानकारी उनकी आगे आने वाली पुस्तकों में होगी।

1989 में छोड़ी थी आईएफएस की नौकरी
अय्यर ने 1989 में भारतीय विदेश सेवा छोड़ दी थी और इसके बाद राजनीति के अज्ञात क्षेत्र में कदम रखा था। उनका कहना है कि उस फैसले के लिए उन्हें कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि राजीव गांधी 'बड़ी अनिच्छा' के बावजूद उन्हें राजनीति में लेने के लिए सहमत हुए थे।

क्या आईएफएस में वापस जाना कभी एक विकल्प था? इस पर उन्होंने कहा, मुझे एहसास हुआ कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में जितना मैंने खुद का राजनीतिकरण किया है, अगर मैं वापस जाता तो विदेश सेवा में मेरे साथ समानता का व्यवहार नहीं किया जाता। अय्यर ने कहा, मुझे यह भी पता चला कि चूंकि मैं मनमौजी दिमाग का था, इसलिए मैं भारतीय विदेश नीति के कई प्रमुख बिंदुओं से सहमत नहीं था...और अगर वे मुझे सचिव या विदेश सचिव के पद पर पदोन्नत करने की गलती करते हैं, तो उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हो सकता था क्योंकि हो सकता था कि मैं उनकी बात नहीं मानता।

राजनीतिक करियर को लेकर जताई चिंता
उन्होंने कहा, यह 2023 है। मैं पिछले सात वर्षों से राज्यसभा से बाहर हूं और मैं पिछले 10 वर्षों से कांग्रेस में बिना किसी पद के हूं। मैंने इसकी आशा नहीं की थी। मैंने सोचा था कि शुरुआत में मुझे 10 साल तक कोई पद नहीं मिलेगा और शायद उसके बाद मुझे पहचाना जाएगा लेकिन मेरे मामले में यह विपरीत निकला। अय्यर ने कहा कि वह शुरू से ही भारत के पहले प्रधानमंत्री और उनकी धर्मनिरपेक्षता से काफी प्रभावित थे। इसी बात ने उनकी विचारधारा को कांग्रेस से जोड़ दिया। अय्यर ने किताब का अंत अगले खंड की एक झलक के साथ किया है, जो उनके राजनीतिक जीवन के बारे में होगा जिसे वह राजनीति में "आधा जीवन" कहते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें