कर्नाटक के मंगलूरू में शनिवार को एक चलते ऑटो रिक्शा में हुए विस्फोट मामले में पुलिस ने एक और बड़ा खुलासा किया है। मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोट मामले में संदिग्ध आत्म-कट्टरपंथी हैं और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर समूहों से प्रारंभिक तौर पर बम बनाना सीखा था। इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की।
इससे पहले बुधवार को उन्होंने उस स्थान का भी दौरा किया, जहां घटना हुई थी।
मामले में मुख्य संदिग्ध 24 वर्षीय मोहम्मद शरीक और उसके सहयोगी अब्दुल मथीन ताहा, अराफात अली, माज मुनीर अहमद और सैयद यासीन सभी शिवमोग्गा जिले के तीर्थहल्ली के निवासी हैं। पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा कि अब तक हमने पाया है कि उनका किसी भी संगठन से कोई संबंध नहीं था, लेकिन उन्होंने विभिन्न स्रोतों के माध्यम से इस्लामिक स्टेट द्वारा प्रदान की गई सामग्री तक पहुंच बनाई। और अपनी प्रेरणा से उन्होंने इन गतिविधियों की योजना बनाई।
अधिकारी के अनुसार, इस समूह में केवल अब्दुल ताहा अल-हिंद मॉड्यूल का एक कथित सदस्य है। अल-हिंद मॉड्यूल दक्षिण भारत के जंगलों में एक आईएस प्रांत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम पर कई बंद ग्रूप हैं और इस्लामिक स्टेट से जुड़े कई अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म हैं, जिसपर प्रचार सामग्री, बम और विस्फोटक बनाने के डू इट योरसेल्फ (DIY) वीडियो मौजूद हैं। उन्होंने इसी का इस्तेमाल किया है।
अधिकारी ने यह भी कहा कि शरीक के फोन से बाइक बम बनाने और कुकर बम बनाने के वीडियो भी बरामद किए गए हैं। मंगलूरू में विस्फोट के एक दिन बाद राज्य के पुलिस प्रमुख प्रवीण सूद ने इस घटना को "गंभीर नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया आतंकी कार्य" बताया था। मंगलवार को मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आईईडी की प्रकृति से पता चलता है कि समूह के पास बड़ी धनराशि या किसी का समर्थन नहीं था। उन्होंने कहा कि बम बनाने में पोटैशियम क्लोरेट का इस्तेमाल किया गया था- इस रसायन का इस्तेमाल माचिस और पटाखों में किया जाता है।
पुलिस ने रविवार रात मैसूर में शरीक के घर से 150 माचिस, सल्फर पाउडर और बारूद बरामद किया था। अधिकारी ने कहा कि बाजार में आमतौर पर वाशिंग मशीन का टाइम डिले मैकेनिज्म उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल बम में किया जाता है।