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Mandya Flag Row: धार्मिक झंडे को लेकर हुए विवाद मामले में PDO सस्पेंड, CM बोले- अशांति के पीछे गोडसे के वंशज

Tue, 30 Jan 2024 07:21 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू/मांड्या

सार

धार्मिक ध्वज को लेकर कर्नाटक के मांड्या में हुए तनाव पर सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि नाथूराम गोडसे ने वंशज राज्य में अशांति फैलाना चाहते हैं। इसी बीच, मांड्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेख तनवीर आसिफ ने सोमवार को केरागोडु गांव के पंचायत विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था। 
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सिद्धारमैया (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मांड्या में 108 फीट ऊंचे धार्मिक ध्वज को हटाने के चलते हुए तनाव के मामले में पंचायत अधिकारी को निलंबित कर दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य में शांति भंग करने के लिए गोडसे के वंशजों को जिम्मेदार ठहराया है। सोमवार को भाजपा और जनता दल (सेक्यूलर) ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। इसी बीच, सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि विपक्ष का यह प्रदर्शन राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया गया था। 
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दंगा फैलाने वाले नाथूराम गोडसे के वंशज- सिद्धारमैया
बंगलूरू में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि हमारे बीच ऐसे लोग है, जो नाथूराम गोडसे की पूजा करते हैं, हालांकि कई बार इनके मुंह से महात्मा गांधी के लिए भी शब्द निकलते हैं। मांड्या में तनावपूर्ण स्थिति के बारे में पूछे जाने पर सिद्धारमैया ने कहा कि शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है। राज्य की शांति में खलल डालने वाले लोग गोडसे के वंशज हैं। सीएम ने कहा कि समाज में शांति के लिए लोगों को प्यार और विश्वास के साथ रहना चाहिए। राज्य के सौहार्दपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। 

तिरंगे-राज्य के ध्वज को फहराने की अनुमति दी- सिद्धारमैया
मंड्या हिंसा पर बोलेत हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि केरागोडु पंचायत ने केवल तिरंगे या कर्नाटक राज्य के झंडे को फहराने की अनुमति दी थी, किसी धार्मिक या राजनीतिक झंडे को किसी भी तरह की अनुमति नहीं दी गई थी। सीएम ने आरोप लगाया झंडा विवाद जानबूझकर राज्य में अशांति फैलाने के लिए किया गया था। इसी बीच, मांड्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेख तनवीर आसिफ ने सोमवार को केरागोडु गांव के पंचायत विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया था। आदेश में उन्होंने कहा कि गांव में केवल राष्ट्र ध्वज फहराने की अनुमति दी गई है। हालांकि, पीडीओ ने न केवल लोगों को धार्मिक ध्वज फहराने का मौका दिया, बल्कि इसे हटाने के लिए भी कदम नहीं उठाया।
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