केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने दिल्ली में लिम्फेटिक फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए भारत के रोडमैप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने 2027 के अंत तक इस बीमारी के उन्मूलन के लक्ष्य के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को कहा कि भारत में लिम्फेटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) बीमारी को नजरअंदाज नहीं किया गया है। इसे समयबद्ध तरीके से खत्म करना सरकार की प्राथमिकता है। लिम्फेटिक फाइलेरिया के उन्मूलन के लिए भारत के रोडमैप पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए मंडाविया ने 2027 के अंत तक देश से इस बीमारी को खत्म करने के लक्ष्य के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 के अंत तक बीमारी को खत्म करने की प्रतिबद्धता के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय नए सिरे से पांच-स्तरीय रणनीति लेकर आया है, जिसके तहत मल्टी-ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) का आयोजन साल में दो बार 10 फरवरी और 10 अगस्त को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के साथ किया जाएगा।
मंडाविया ने कहा कि केंद्र द्वारा 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 133 जिलों को मुफ्त में एंटी-फाइलेरिया दवाएं प्रदान की जाती हैं। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी कार्रवाई और सामाजिक सुधार के सही तालमेल का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी में शुरू की गईं लिम्फेटिक फाइलेरियासिस के उन्मूलन के लिए उन्नत रणनीतियां इस साल 10 फरवरी को मिशन मोड में अखिल भारतीय एमडीए अभियान के शुभारंभ के अग्रदूत के रूप में काम करेंगी। मंडाविया ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस दिन को राष्ट्रीय, राज्य, जिला, उप-जिला और ब्लॉक स्तरों पर आवश्यक व्यापक दृश्यता अभियानों के साथ मनाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लिम्फेटिक फाइलेरियासिस रोधी दवाएं सभी तक पहुंच सकें।