'कांग्रेस ने दो सीटों की पेशकश ठुकराई'
बनर्जी ने एक सार्वजनिक वितरण कार्यक्रम में कहा, टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया, क्योंकि कांग्रेस ने राज्य में दो सीटों पर लड़ने का उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस का राज्य विधानसभा में एक भी विधायक नहीं है। मैंने उन्हें मालदा की दो लोकसभा सीटों की पेशकश की। लेकिन, वह और सीटें चाहते थे। इसलिए, मैने उनसे कहा कि मैं उनके साथ एक भी सीट साझा नहीं करूंगी। उनकी नेता माकपा है।'
'मिलीभगत कर रहे कांग्रेस और माकपा'
टीएमसी सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में भाजपा को मजबूत करने के लिए कांग्रेस और माकपा मिलीभगत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'केवल तृणमूल कांग्रेस सक्रिय रूप से भाजपा का विरोध कर रही है।' उन्होंने कहा, 'माकपा अब कांग्रेस की नेता है। मैं माकपा को कभी माफ नहीं करूंगी। मैं माकपा का समर्थन करने वालों को माफ नहीं करूंगी। मैंने उनसे कहा कि उन्हें पहले माकपा छोड़नी होगी। माकपा के साथ मिलकर वे भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। मैंने पिछले पंचायत चुनावों में यह देखा है।'
'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पर साधा निशाना
इससे एक दिन पहले बनर्जी ने घोषणा की थी कि टीएमसी राज्य में लोकसभा की सभी 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इस एलान से पश्चिम बंगाल में विपक्षी गठबंधन को करारा झटका लगा। बनर्जी ने किसी का नाम लिए बगैर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग हैं जो चुनाव के समय आएंगे, चहचहाएंगे और फिर चले जाएंगे।'
कांग्रेस ने मालदा के लोगों के लिए क्या किया?
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि माकपा ने अपने 34 साल के शासन में राज्य के लोगों प्रताड़ित किया। बनर्जी ने कहा कि वह वाम पार्टी को कभी माफ नहीं कर पाएंगी। उन्होंने कहा, 'मालदा से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिवंगत गनी खान चौधरी के परिवार से अगर कोई चुनाव लड़ता है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन टीएमसी भी चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस पिछले कई वर्षों से मालदा में दोनों सीटें जीतती रही है। लेकिन उन्होंने लोगों के लिए क्या किया है?'