पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने है। ताजा मामला मदर टेरेसा के एनजीओ का है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया केंद्न ने मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी एनजीओ के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। वहीं, एनजीओ ने साफ कर दिया कि उनका कोई भी अकाउंट ना तो फ्रीज हुआ है और ना ही किसी तरह की गड़बड़ी हुई है। सबकुछ ठीक चल रहा है। ममता बनर्जी के दावे के बाद सोशल मीडिया पर वायरल इस खबर के बाद सनसनी फैल गई । कुछ यूजर्स ने ममता के पक्ष में लिखा तो कुछ ने केंद्र सरकार के सुर में सुर मिला रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर सनसनी फैला दी। ममता बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा "यह सुनकर हैरान हूं कि क्रिसमस पर केंद्रीय मंत्रालय ने भारत में मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खातों को सील कर दिया है। उनके 22 हजार मरीजों और कर्मचारियों को भोजन और दवाओं के बिना छोड़ दिया गया।भले ही कानून सर्वोपरि है, लेकिन मानवीय प्रयासों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।"
संस्था ने कहा- सब सामान्य है
संस्था को लेकर विवाद बढ़ता देख मदर टेरेसा के एनजीओ मिशनरीज ऑफ चैरिटी संगठन ने इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संस्था की प्रवक्ता सुनीता कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारी ऐसी किसी भी कार्रवाई की जानकारी नहीं है। संस्था में सब कुछ ठीक है। सुनीता की मानें तो वह इस पूरे मामले से अनभिज्ञ है। भारत सरकार ने हमें ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है। बैंक ट्रांजेक्शन सही तरीके से काम कर रहे हैं।
ममता के दावे पर केंद्रीय गृह मंत्रालय का जवाब
ममता बनर्जी के आरोपों के बाद गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर करारा जवाब दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि उसने मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खातों को फ्रीज नहीं किया, बल्कि एनजीओ के विदेशी अंशदान विनियमन एक्ट (एफसीआरए) रजिस्ट्रेशन के रिन्यूवल कराने के लिए आवेदन भेजा गया था, जिसे संस्था ने इनकार कर दिया। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी के एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के रिन्यूवल को आगे नहीं बढ़ाने की बात कही गई क्योंकि, एनजीओ की ओर से एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन एक्ट 2010 और एफसीआरआर यानी विदेशी अंशदान विनियमन नियम 2011 के तहत दिया गया आवेदन को पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करता है। जिसके चलते 25 दिसंबर, 2021 को रिन्यूवल को अस्वीकार कर दिया गया था। गृह मंत्रालय ने कहा है कि 'एनजीओ मिशनरीज ऑफ चैरिटी का रजिस्ट्रेशन 31 दिसंबर 2021 तक वैध है।
विदेशी अंशदान विनियमन एक्ट 2020 क्या है?
केंद्र सरकार ने 2020 में विदेशी अंशदान विनियमन कानून में संशोधन किया है। विदेशी अंशदान विनियमन एक्ट 2020 के तहत अब गैर-सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ को अपने प्रशासनिक कार्यों पर विदेश से मिलने वाले फंड से केवल 20 फीसदी हिस्सा ही खर्च करने की अनुमति है। जबकि पहले यह 50 फीसदी हुआ करता था। विदेशों से आना वाले दान का आधा हिस्सा एनजीओ की देखरेख और रखरखाव के नाम पर खर्च करने की छूट थी, लेकिन विदेशी अंशदान विनियमन एक्ट 2020 के पास होने के बाद अब एनजीओ को विदेशी दान का अधिकांश हिस्से को सेवा कार्य में ही खर्च करने का प्रावधान कर दिया गया है। पहले बड़े एनजीओ को मिलने वाला विदेशी दान छोटे या अन्य एनजीओ के साथ भी शेयर किया जा सकता था। लेकिन, अब सरकार ने इसे भी खत्म कर दिया है।
क्या मिशनरीज ऑफ चैरिटी
मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक रोमन कैथोलिक स्वयंसेवी संगठन है। इसकी स्थापना 1950 में मदर टेरेसा ने कलकत्ता में की थी। यह संस्था विश्व-भर में मानवीय सेवा का कार्यों करती है। आज दुनिया के 120 से भी अधिक देशों में विभिन्न मानवीय कार्यों में संमग्न 4500 से भी अधिक ईसाई मिशनरियों की मंडली है।