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CBI: ऊर्जा संस्थान में सीबीआई ने रिश्वत के खेल का किया भंडाफोड़, संयुक्त निदेशक 9.5 लाख लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

Sat, 10 Jan 2026 03:53 AM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

CBI Investigation: सीबीआई ने बंगलूरू स्थित केंद्रीय ऊर्जा शोध संस्थान के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहन राव चेन्नू को 9.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। तलाशी में कई करोड़ की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद हुई। आइए जानतें हैं मामले में आरोपी पर कौन से आरोप लगे हैं।
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लखनऊ में सीबीआई रेड। डेमो पिक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए बंगलूरू स्थित केंद्रीय ऊर्जा शोध संस्थान के संयुक्त निदेशक राजाराम मोहन राव को 9.5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। 

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कार्रवाई के दौरान एक निजी कंपनी के अधिकारी को भी पकड़ा गया। इस गिरफ्तारी से सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे सामने आया रिश्वत का मामला
सीबीआई के अनुसार, 8 जनवरी को संयुक्त निदेशक और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि संयुक्त निदेशक निजी कंपनी सुधीर ग्रुप ऑफ कंपनीज के बनाए इलेक्ट्रिकल उपकरणों के पक्ष में जांच रिपोर्ट देने के बदले रिश्वत मांग रहा था। पुख्ता सूचना के आधार पर सीबीआई ने जाल बिछाया और शुक्रवार को बंगलूरू में रिश्वत के लेनदेन के दौरान दोनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।

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तलाशी में कितनी नकदी बरामद
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने संयुक्त निदेशक के आवास पर तलाशी ली। इस दौरान करीब 3.59 करोड़ रुपये नकद, 4 लाख रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा और गहने बरामद किए गए। विदेशी मुद्रा में अमेरिकी डॉलर, हांगकांग डॉलर, सिंगापुर डॉलर, इंडोनेशियाई रुपया, मलयेशियाई रिंगिट, यूरो, युआन, स्वीडिश क्रोना और दिरहम शामिल हैं। साथ ही कई अहम दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

ऐसे छिपाया गया था पैसा
सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान एक कमरे में तीन बड़े सूटकेस मिले। जब इन्हें खोला गया तो सभी सूटकेस नकदी से भरे हुए थे। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपी अधिकारी लंबे समय से भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल था और अपने पद का दुरुपयोग कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रहा था।

सीबीआई ने ये आरोप लगाए
सीबीआई का कहना है कि संयुक्त निदेशक ने संस्थान की जिम्मेदारियों का गलत इस्तेमाल किया और जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। निजी कंपनी के उत्पादों को मंजूरी दिलाने के बदले रिश्वत ली जा रही थी। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस भ्रष्टाचार नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था और इससे पहले कितनी बार इस तरह के लेनदेन हुए।
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सीबीआई ने संकेत दिए हैं कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जब्त दस्तावेजों और नकदी की जांच के बाद भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। एजेंसी ने साफ किया है कि सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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