महुआ मोइत्रा की याचिका में केंद्र के अध्यादेशों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशकों का कार्यकाल बढ़ाने के अध्यादेश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। उन्होंने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देने वाले केंद्र के अध्यादेशों को चुनौती दी है। उन्होंने दावा किया है कि यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ हैं। महुआ मोइत्रा ने इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र के अध्यादेश "सीबीआई और ईडी की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर हमला करते हैं" और केंद्र को "उन निदेशकों को चुनने और चुनने का अधिकार देते हैं जो कार्यकाल के विस्तार के प्रयोजनों के लिए सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करते हैं।"
याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश "केंद्र सरकार को 'जनहित' में इन निदेशकों के कार्यकाल को बढ़ाने की शक्ति का उपयोग करके मौजूदा ईडी निदेशक या सीबीआई निदेशक को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने की अनुमति देता है।"
याचिका में कहा गया है कि अध्यादेश निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, जैसा कि संविधान में समानता के अधिकार और जीवन के अधिकार के तहत निहित है।