महाराष्ट्र के परभणी जिले में अनूठा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। हाल ही में ट्रांसफर के बाद जिला कलेक्टर बनाई गईं एक महिला आईएएस अधिकारी परभणी में कलेक्टर का पदभार ग्रहण नहीं कर सकीं। निवर्तमान कलेक्टर रिलीव होने के पूर्व अंतिम समय में महिला आईएएस को पदभार सौंपने की बजाए डिप्टी कलेक्टर को पदभार सौंपकर चल दिए। आरोप लगाया जा रहा है कि राज्य में सत्तारूढ़ शिवसेना के स्थानीय नेता नए कलेक्टर को नहीं चाहते हैं, इसलिए ऐसा किया गया।
परभणी के एक स्थानीय भाजपा नेता सोमवार को आरोप लगाया कि शिवसेना को ध्यान रखना चाहिए कि परभणी के लोगों ने उन्हें समर्थन दिया है। वहीं एक सामाजिक संगठन ने प्रदर्शन करते हुए मांग की कि आईएएस अधिकारी अचल गोयल को जनहित में कलेक्टर का पदभार तुरंत दिया जाए।
बता दें, महाराष्ट्र में शिवसेना नीत तीन दलों की महाविकास अघाड़ी सरकार सत्तारूढ़ है। परभणी जिला शिवसेना समर्थक माना जाता है, वहीं एनसीपी के नेता व राज्य के मंत्री नवाब मलिक जिले के प्रभारी मंत्री हैं।
जागृत नागरिक अघाड़ी की अध्यक्ष माधुरी क्षीरसागर ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि सभी लोग जानना चाहते थे कि 31 जुलाई को दीपक मुगलीकर के रिटायर होने के बाद कौन नया कलेक्टर होगा? इसके बाद हमें अखबारों से पता चला कि आईएएस अधिकारी अचला गोयल को यहां पदस्थ किया गया है। गोयल समय से पहले परभणी आ गईं, लेकिन 31 जुलाई को मुगलीकर को राज्य सरकार ने कहा कि वे प्रभारी अतिरिक्त कलेक्टर राजेश काटकर को सौंप दें। क्षीरसागर ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं की वजह से यह हुआ, यह शर्मनाक है। इससे साबित होता है कि राज्य सरकार का महिला सशक्तिकरण का दावा खोखला है।
जागृत नागरिक अघाड़ी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की, क्योंकि राज्य का सामान्य प्रशासन विभाग उन्हीं के पास है। साथ ही क्षीरसागर ने यह भी कहा कि इस घटना से परभणी की क्षवि खराब हुई है। सीएम ठाकरे को दखल देकर अचला गोयल को पुन: जिला कलेक्टर नियुक्त करना चाहिए।
उधर, भाजपा की स्थानीय विधायक मेघना बोरदीकर ने कहा कि अच्छे अधिकारियों को हमेशा परभणी में काम करने से रोका जाता है। कुछ निजी राजनीतिक हितों के चलते उन्हें यहां काम नहीं करने देते।