महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और अन्य क्षेत्रों में (विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र) सूखे की समस्या को अब 32 हफ्ते होने जा रहे हैं। यहां बीड और औरंगाबाद जिले की सीमा पर पड़ने वाले आदुल गांव के लोग नहाने के पानी को दोबारा इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां के लोग नहाने के पानी से घर के अन्य काम कर रहे हैं।
बता दें नहाने के पानी को ग्रे वॉटर भी कहा जाता है। जो ना तो पीने के योग्य होता है और ना ही घर के कामों के। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें साबुन के कण और डेड स्किन घुले होते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उनके पास इस पानी को इस्तेमाल करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आदुल गांव के रहने वाले राधाकृष्ण बाबुराओ (40) एक किसान हैं। उनके घर में उनकी पत्नी, माता-पिता, भाई और भाई की पत्नी हैं। बाबुराओ खाट (रस्सियों की सहायता से बनाया गया पलंग) पर बैठकर नहाते हैं और उनकी पत्नी खाट के नीचे टब लगा देती हैं।
जब वह नहाते हैं तो खाट के नीटे रखे टब में पानी जमा होने लगता है। जिसका इस्तेमाल बाद में घर के बाकी लोग करते हैं। हैरानी की बात तो ये है कि टब में एकत्रित पानी का इस्तेमाल करने के लिए महिलाओं की बारी अंत में आती है।
औरंगाबाद जिले के इस गांव में रहने वाले लोग नहाने के पानी का इस्तेमाल कपड़े और बर्तन धोने के लिए करते हैं। ऐसा करना यहां लोगों के लिए एक आम बात हो गई है। गांव के एक निवासी का कहना है, "यह चौंकाने वाला क्यों होना चाहिए? एक ऐसे समय में जब हम गंभीर पानी के संकट का सामना कर रहे हैं, हमारे सामने केवल दो रास्ते बचते हैं: या तो जिओ या मर जाओ।" आदुल औरंगाबाज जिले के 1,372 गांवों में से एक है, जो बीते साल से सूखे का सामना कर रहा है। आदुल की जनसंख्या 13 हजार है।