लोकसभा सांसद ने कहा, मुझे भरोसा है कि राज्य के लोग अजित पवार के नेतृत्व में पार्टी द्वारा अपनाए गए राजनीतिक रुख पर मुहर लगाएंगे। अजित पवार और आठ विधायकों के एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद राकांपा दो जुलाई को टूट गई थी, जिसके बाद पार्टी के संस्थापक शरद पवार के नेतृत्व वाले समूह ने उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं।
तटकरे ने जीत दर्ज करने का भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी विधानसभा चुनाव एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के नेतृत्व में लड़ेगी। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे और समायोजन के बारे में फैसला आम सहमति से किया जाएगा।
उन्होंने कहा, हम अजित पवार को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा चुनावों की राजनीतिक चुनौतियां हैं। पूर्वी विदर्भ का दौरा कर रहे राकांपा नेता ने नागपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित किया।
सभा को संबोधित करते हुए तटकरे ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में शामिल होने और अपनी धर्मनिरपेक्ष साख से समझौता किए बिना राजग का सहयोगी बनने के पार्टी के फैसले का बचाव किया।
ओबीसी आरक्षण की कीमत पर मराठा कोटा देने की कोशिश कर रही सरकार : पूर्व सांसद राठौड़
पूर्व सांसद हरिभाऊ राठौड़ नेकहा कि महाराष्ट्र सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण की कीमत पर मराठाओं को नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने की कोशिश कर रही है, लेकिन ओबीसी इस कदम को बर्दाश्त नहीं करेगा। ओबीसी नेता राठौड़ ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन के बाद एकनाथ शिंदे सरकार मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने की दिशा में काम कर रही है।
जरांगे की मांगों में से एक यह भी है कि मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र दिया जाए। कृषि कुनबी समुदाय को पहले से ही ओबीसी श्रेणी में कोटा का लाभ मिलता है। उन्होंने कहा, 'इसका मतलब है कि ओबीसी के साथ घोर अन्याय होगा।' उन्होंने कहा कि अगर सरकार करोड़ों मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र देना शुरू करती है तो वे बर्दाश्त नहीं करेंगे।'