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Dussehra Rally: विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में शक्ति प्रदर्शन, शिंदे और उद्धव गुट आज दिखाएंगे दमखम

Sat, 12 Oct 2024 01:06 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

शिवसेना दशहरा रैली साल 1960 से ही कर रही है। पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे ने पहली बार दशहरा रैली की थी। दशहरा रैली शिवसेना की राजनीतिक रणनीति की आधारशिला रही हैं। इस साल शिंदे और ठाकरे दोनों ही मुंबई में रैली कर रहे हैं। 
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एकनाश शिंदे बनाम उद्धव ठाकरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले मुंबई में आज शिवसेना के दोनों धड़ आमने-सामने होंगे। इन दलों के नेता, कार्यकर्ता अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना भी आज दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में  रैली करने जा रही है। शिंदे के गुट की दशहरा रैली में लगभग दो लाख लोगों की उपस्थिति की उम्मीद है। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना दादर के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में आज दशहरा रैली करेगी। इन्ही रैलियों को लेकर राज्य की सियासत गरमाई गई है। 
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घटों तक होंगे कार्यक्रम
दोनों ही कार्यक्रम घंटों तक चलेंगे। यहां कार्यक्रम से पहले उत्सव और खाने-पीने के स्टॉल लगेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे और मुख्यमंत्री शिंदे अपने-अपने मैदानों में भाषण देंगे। जानकारी के अनुसार, शहर में हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण दोनों पक्षों को परेशानी हो सकती है। उद्धव ठाकरे जिस शिवाजी पार्क में रैली करेंगे वहां पर बीती रात बारिश हुई। इसकी वजह से वहां पर कीचड़ हो गया था। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि रैली तय समय पर होगी। उम्मीद की जा रही है कि उद्धव ठाकरे इस मंच का उपयोग भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधने के लिए करेंगे और उस पर 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद से शिवसेना की एकता को कमजोर करने का आरोप लगा सकते हैं।

1960 से हर होती है दशहरा रैली
शिवसेना दशहरा रैली साल 1960 से ही कर रही है। पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे ने पहली बार दशहरा रैली की थी। दशहरा रैली शिवसेना की राजनीतिक रणनीति की आधारशिला रही हैं। शिवसेना की दशहरा रैली हर साल दशहरा के दिन आयोजित की जाती है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को समाप्त हो रहा है। चुनाव से पहले ये रैलियां महत्वपूर्ण महत्व रखती हैं क्योंकि दोनों गुट चुनाव से पहले अपना समर्थन मजबूत करना चाहते हैं।
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दोनों गुटों ने रैली से पहले जारी किया टीजर
दोनों गुटों ने रैली के लिए टीजर जारी किए हैं। शिंदे की प्रचार सामग्री में शिव सेना का प्रतीक बाघ दिखाया गया है और इसमें पार्टी को कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए दिखाया गया है। इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) महाराष्ट्र के गौरव की रक्षा के विषयों पर ध्यान केंद्रित करती है और विद्रोही विधायकों के संदर्भ में तथाकथित गद्दारों की निंदा करती है।

आइए जानें किस नेता ने क्या कहा-

लाखों की संख्या में लोग आएंगे: कायंदे
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने कहा, 'लाखों की संख्या में लोग आएंगे। रैली आजाद मैदान में होगी। बालासाहेब ठाकरे के विचारों को सुनने के लिए देशभर से शिवसैनिक यहां आते थे। जिन हिंदुत्व के विचारों को लेकर एकनाथ शिंदे ने पहल की है। शिवसेना जिस रास्ते से भटक गई थी, उसे वापस लाने का काम शिंदे ने किया है। हम सब उनके समर्थक हैं, हिंदुत्व के समर्थक हैं।'

आज मुंबई में दो दशहरा रैलियां एक असली और दूसरी नकली: आंनद दुबे
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, 'आज मुंबई में दो दशहरा रैलियां हो रही हैं। एक असली शिवसेना की और दूसरी नकली शिवसेना की। असली शिवसेना की रैली हर साल की तरह इस साल भी शिवतीर्थ में हो रही है। उद्धव बालासाहेब ठाकरे की तुलना किसी अन्य शिवसेना या किसी अन्य नकली शिवसेना से नहीं की जा सकती। उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र के सम्मान और चरित्र के लिए काम किया है। दूसरों ने महाराष्ट्र की पीठ में छुरा घोंपा है और दिल्ली के सेवक रहे हैं। एक-दो महीने में नकली शिवसेना कहीं नजर नहीं आएगी। सिर्फ एक शिवसेना होगी।'

अगर साहस है तो बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर इस्तेमाल नहीं करें: आदित्य ठाकरे
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, 'वह (एकनाथ शिंदे) जो कुछ भी करते हैं या कहते हैं, वह दिखाता है कि उन्हें अपने परिवार में क्या संस्कार मिले हैं। उनका व्यवहार तीसरी प्रति की तरह है, लेकिन सच सच होता है। अगर उनमें यह साहस है तो उन्हें बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर, शिवसेना के नाम और धनुष-तीर के प्रतीक का इस्तेमाल किए बिना अपनी खुद की छवि के साथ जनता के बीच जाना चाहिए।'

एकनाथ शिंदे की पार्टी का जन्म गुजरात में हुआ: राउत
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा, 'लोकतंत्र में संविधान ने सभी को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार दिया है, लेकिन अगर हम दशहरा रैली की बात करें तो 50 साल से भी ज्यादा समय से शिवाजी पार्क में बालासाहेब ठाकरे की दशहरा रैली ऐतिहासिक रही है। वहीं से बालासाहेब ठाकरे ने हमेशा देश के लिए एक संदेश दिया है, शिवसेना को दिशा दी है। नागपुर में भी सुबह आरएसएस का कार्यक्रम होता है। अब यहां (महाराष्ट्र) भी शिवसेना के लोगों की नकल करते हुए दशहरा रैली निकालेंगे। वे पैसे देकर लोगों को लाएंगे। मगर, उनके पास क्या विचार है? उस पार्टी का जन्म महाराष्ट्र में नहीं, गुजरात में हुआ था। इसलिए उन्हें गुजरात के सूरत में कार्यक्रम करना चाहिए। उन्हें वहां अपना कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए, पीएम मोदी को बुलाना चाहिए, अमित शाह को बुलाना चाहिए, वे उनके नेता हैं। महाराष्ट्र में उनके पास क्या है? उनकी पार्टी गुजरात से नियंत्रित है।'

उन्होंने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारतीय वायुसेना के सी-295 विमान की उद्घाटन लैंडिंग पर कहा, 'यह (महाराष्ट्र में) चुनावों के लिए 'स्टंटबाजी' है। सरकार के लोगों ने वहां से सटे इलाके की सारी जमीन खरीद ली है। इसलिए, वे वहां जमीन की कीमत बढ़ाने के लिए यह नाटक कर रहे हैं ताकि वे इसे बाद में बेच सकें। वे ठेकेदार के रूप में काम कर रहे हैं।'



उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस का साथ अपनाकर हिंदुत्व छोड़ दिया: संजय निरुपम
शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा, 'शिवसेना की दशहरा रैली का ऐतिहासिक संदर्भ है। वर्षों तक, शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे दशहरा रैलियों को संबोधित करते रहे। उन रैलियों में वे हिंदुत्व के बारे में अपने विचारों को शिवसैनिकों तक पहुंचाते थे। खासकर, वह धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति और उसके सांप्रदायिक दृष्टिकोण की आलोचना करते थे। आज स्थिति यह है कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है और हिंदुत्व छोड़ दिया है। शिवाजी पार्क में अगर वह बोलेंगे तो हिंदुत्व की बात नहीं कर पाएंगे, अगर वह हिंदुत्व की बात करेंगे तो उनका मुस्लिम वोट बैंक गड़बड़ा जाएगा। जिस स्थान पर बालासाहेब ठाकरे के विचारों को स्वतंत्र रूप से और सही मायने में व्यक्त किया जाएगा, वह आजाद मैदान है और महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे उस रैली को संबोधित करेंगे। वहां वह हिंदुत्व के बारे में शिवसेना प्रमुख के विचारों को व्यक्त करेंगे।'
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