महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बुधवार देर शाम फेसबुक के जरिए संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने महा विकास अघाड़ी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और बागियों को संदेश भी दिया। इसके बाद एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे को जवाब दिया। उन्होंने ट्वीट कर चार बिंदुओं में अपनी बात रखी। इसमें उन्होंने एमवीए सरकार से शिवसेना को हुए नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के अस्तित्व के लिए अप्राकृतिक गठबंधन से बाहर निकलना जरूरी है। आइए जानते हैं वह चारों पॉइंट...
- पिछले ढाई साल में एमवीए सरकार ने केवल घटक दलों को फायदा पहुंचाया और शिवसैनिकों को भारी नुकसान हुआ।
- घटक दल मजबूत हो रहे हैं, शिवसेना और शिवसैनिक का व्यवस्थित रूप से गबन किया जा रहा है।
- पार्टी और शिवसैनिकों के अस्तित्व के लिए अस्वाभाविक मोर्चे से बाहर निकलना जरूरी है।
- महाराष्ट्र के हित में अब निर्णय लेने की जरूरत है।
इससे पहले गुवाहाटी में डेरा डाले हुए शिवसेना के बागी एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उन्हें अपनी पार्टी के 34 विधायकों का समर्थन है और उन्होंने बुधवार शाम को एक प्रस्ताव पारित कर खुद को शिवसेना विधायक दल के नेता के रूप में बहाल कर दिया। इससे एक दिन पहले शिवसेना नेतृत्व ने उन्हें विधायक दल के नेता पद से हटा दिया था। शिंदे गुट की ओर से पारित प्रस्ताव में शिवसेना विधायक भरत गोगावाले को पार्टी का नया मुख्य सचेतक बनाया गया और मौजूदा सुनील प्रभु को पद से हटा दिया गया। दोपहर के समय शिंदे द्वारा जारी किए गए पत्र पर शिवसेना के 34 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, यह संख्या अब 50 के करीब बताई जा रही है, जिनमें कई निर्दलीय भी हैं।
इससे पहले दिन में प्रभु ने एक पत्र जारी कर शिंदे के साथ आए बागियों समेत शिवसेना के सभी विधायकों को शाम पांच बजे मुंबई में विधायक दल की बैठक में शामिल होने या दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई का सामना करने को कहा था। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 55 विधायक हैं। दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के अनुसार, विलय के लिए किसी विधायक दल के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति की आवश्यकता होती है, जिन्होंने किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ विलय करने की सहमति दी हो। अयोग्यता से बचने के लिए शिंदे को 37 विधायकों (55 विधायकों में से दो तिहाई) का समर्थन सुनिश्चित करना होगा।