साल 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा था- मैं वापस आऊंगा। इस टिप्पणी के कारण सोशल मीडिया पर उनके कई मीम बनने लगे। वीडियो क्लिप पर प्रतिक्रिया देते हुए पटोले ने कहा कि भाजपा को इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योकि जनता पहले ही उन्हें (फडणवीस) अपने दिलों से हटा चुकी है।
पटोले ने दावा किया कि फडणवीस भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के पक्ष में नहीं हैं, जबकि लोगों ने झूठ बोलने वालों की पार्टी पर भरोसा करना बंद कर दिया है। पटोले ने दावा किया, सोशल मीडिया का महत्व बढ़ गया है। किसी को ट्वीट (एक्स पर वीडियो क्लिप) की प्रतिक्रियाओं को देखना चाहिए। लोगों ने कहा है कि वे भाजपा को कोई मौका नहीं देना चाहते हैं।
शुक्रवार की घटना ने राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलों को जन्म दे दिया है, खासकर तब जब विधानसभा अध्यक्ष पिछले साल जून में शिवसेना के विभाजन के संबंध में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके कई विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं।
पटोले ने यह भी कहा कि केले और कपास की खेती करने वाले किसान परेशान हैं और राज्य सरकार को उन्हें तत्काल राहत प्रदान करनी चाहिए। जलगांव में संवाददाताओं से बातचीत में पटोले ने किसानों और बेरोजगार युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की।
उन्होंने दावा किया, राज्य सरकार एक रुपये में फसल बीमा देने का दावा करते हुए अपना ढिंढोरा पीट रही है। राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा बीमा फर्मों को भुगतान किए जा रहे प्रीमियम का हिस्सा भी सार्वजनिक धन है।उन्होंने आरोप लगाया, सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया है। राज्य में सूखा पड़ा है और सरकार ने बीमा कंपनियों से सोयाबीन की फसल के नुकसान के मुआवजे के रूप में 25 फीसदी देने को कहा है, लेकिन फर्मों ने इस अनुरोध को कूड़ेदान में फेंक दिया है।