नगर निगम ने दी सफाई
निगम द्वारा दो बार दी गई मंजूरी पर निगम का कहना है कि यह जमीन आरक्षित थी इस कारण मंजूरी नहीं दी गई। लेकिन अप्रैल 2004 में देशमुख सोलापुर से बीजेपी विधायक थे और उन्होंने नगर निगम को शपथपत्र दिया जिसमें उसने कहा था कि उन्होंने राज्य सरकार को जमीन पर से आरक्षण खत्म करने का प्रस्ताव दिया है, निर्माण कार्य के लिए इजाजत मांगी और सरकार के इस मामले में आखिरी फैसले पर दृढ़ रहने के लिए वादा किया। यानि दो बार मंजूरी दी गई लेकिन फिर भी आखिरी
फैसला राज्य सरकार का ही था।
दायर हुई याचिका
साल 2014 में आरक्षित जमीन पर निर्माण करने पर सोलापुर के कार्यकर्ता महेश चवन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। अगस्त 2016 में कोर्ट ने चवन की याचिका नगर निगम कमिश्नर को सौंप दी और कहा कि नागरिक प्रमुख इस पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाएंगे। चवन का इस पर कहना है कि नागरिक प्रमुख ने सुनवाई तो रखी पर कोई ऑर्डर पास नहीं किया।
हालांकि देशमुख ने मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है। वहीं नितिन भोपले नामक एक अन्य कार्यकर्ता ने सोलापुर नगर निगम के खिलाफ 2017 में याचिका दायर की थी और कहा था कि निगम ने बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा चवन की याचिका में 2016 में जो ऑर्डर दिया था उसका निगम द्वारा पालन नहीं किया गया। जिसमें हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए समय सीमा निश्चित की थी लेकिन नागरिक प्रमुख ने काम को करने में असफल रहे। इसके बाद फरवरी 2018 में सोलापुर नगर निगम ने देशमुख और अन्य के खिलाफ नोटिस जारी कर
सुनवाई में मौजूद रहने के लिए कहा। यह सुनवाई पहले तो आज के दिन होनी थी लेकिन अब बुधवार को होगी।