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बॉम्बे हाईकोर्ट: कोविशील्ड टीके से बेटी की मौत का आरोप, पिता ने मांगा हजार करोड़ का मुआवजा, पढ़िए पूरा मामला

Wed, 02 Feb 2022 06:37 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महाराष्ट्र में एक व्यक्ति ने कोरोना वायरस के कोविशील्ड टीके को लेकर बड़ा दावा करते हुए अपनी बेटी की मौत के लिए इस टीके को जिम्मेदार ठहराया है। इस व्यक्ति ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 1000 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
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कोविशील्ड टीके - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट में एक मेडिकल प्रोफेसर के पिता ने याचिका दाखिल करते हुए 1000 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि मेरी बेटी की मौत कोरोना टीके के दुष्प्रभाव के चलते हुई है। याचिका में कोविशील्ड टीका बनाने वाले भारतीय सीरम संस्थान और इसके सहयोगी बिल गेट्स और केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। 

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याचिका दाखिल करने वाले दिलीप लूनावत के अनुसार उनकी बेटी स्नेहल लूनावत (33) नागपुर के एक मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ प्रवक्ता थी। 28 जनवरी 2021 को उसने नासिक में कोविशील्ड टीके की पहली खुराक ली थी। पांच फरवरी को उसे तेज सिर दर्द हुआ। डॉक्टर ने उसे माइग्रेन की दवा दी, जिसके बाद उसे बेहतर महसूस हुआ। छह फरवरी को उसने गुरुग्राम की यात्रा की थी।
सात फरवरी को उसे उल्टियां हुईं जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां चिकित्सकों ने बताया कि उसके दिमाग में ब्लीडिंग हो सकती है। वहां न्यूरोसर्जन न होने के चलते उसे दूसरे अस्पताल में ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने दिमाग में खून का थक्का होने की आशंका जताई। इसके बाद उसे ब्रेन हैमरेज हो गया। डॉक्टरों ने उसकी सर्जरी की और वह 14 दिन वेंटिलेटर पर भी रही थी।

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एक मार्च 2021 को हो गया था स्नेहल लूनावत का निधन
दिलीप लूनावत के अनुसार सर्जरी के बाद भी स्नेहल की तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और एक मार्च 2021 को उसका निधन हो गया। दिलीप ने दावा किया है कि मेरी बेटी स्वास्थ्य कर्मी थी और इसे टीका लेने के लिए मजबूर किया गया था। उनका कहना है कि इस कोरोना टीके की सुरक्षा पर भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) और एम्स की ओर से दिए गए बयान गलत हैं। 
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'केंद्र की समिति ने माना टीके के दुष्प्रभाव से हुई थी मौत'
उन्होंने सीरम संस्थान पर आरोप लगाया कि टीके का कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया है, यह कहना गलत है। याचिका के अनुसार केंद्र की एईएफआई (टीकाकरण के बाद के प्रभाव) समिति ने दो अक्तूबर 2021 को कहा था कि स्नेहल की जान टीके के दुष्प्रभाव की वजह से गई थी। याचिका में स्नेहल को शहीद घोषित करने की और उसके नाम पर एक शोध संस्थान खोलने की मांग भी की गई है।
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