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Maharashtra: माता-पिता और भाई की मौत का गम, तीन साल तक घर से बाहर ही नहीं निकला शख्स; टीम को ऐसे हाल में मिला

Tue, 01 Jul 2025 09:57 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

नवी मुंबई निवासी अनूप कुमार नायर के माता-पिता की छह साल पहले मौत हो गई। जबकि इससे कुछ समय पहले उनके भाई ने खुदकुशी कर ली थी। माता-पिता की मौत के बाद पेशे से कंप्यूटर प्रोग्रामर रहे अनूप ने खुद को सबसे अलग कर लिया। वे गंभीर अवसाद में चले गएI तीन साल तक घर से बाहर नहीं निकले।
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Stress, Depression, Sad - फोटो : istock
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विस्तार
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महाराष्ट्र के नवी मुंबई में माता-पिता और भाई को खोने के गम में एक युवक तीन साल तक घर में ही बंद रहा। परिवारजनों को खोने के दुख में उसने घर से निकलना बंद कर दिया। पड़ोसियों की सूचना पर जब टीम युवक के घर पर पहुंची तो दरवाजा खुलने के बाद अंदर का हाल देख दंग रह गई। घर के अंदर खाने के पैकेट, कूड़े का ढेर था। जगह-जगह कपड़े बिखरे पड़े थे तो फर्नीचर टूटा हुआ था। जमीन और अन्य सामान पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। टीम ने युवक को एक आश्रम में शिफ्ट किया है। 
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नवी मुंबई निवासी अनूप कुमार नायर के माता-पिता की छह साल पहले मौत हो गई। जबकि इससे कुछ समय पहले उनके भाई ने खुदकुशी कर ली थी। माता-पिता की मौत के बाद पेशे से कंप्यूटर प्रोग्रामर रहे अनूप ने खुद को सबसे अलग कर लिया। वे गंभीर अवसाद में चले गए और अकेले रहने लगे। पहले उन्होंने कुछ रिश्तेदारों से मदद मांगी, लेकिन मदद न मिलने पर अनूप ने उनसे भी दूरी बना ली। 

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जुईनगर की घरकूल सोसाइटी के लोगों ने बताया कि बीते तीन साल में शायद ही कभी वे घर से बाहर निकलें हों। वे कभी बाहर कचरा नहीं निकालते थे। पड़ोसी ही उनको घर का कचरा फेंकने के लिए राजी करते थे। एक पड़ोसी सूचना पर सामाजिक संस्था सोशल एंड इवेंजेलिकल एसोसिएशन फॉर लव (SEAL) के कार्यकर्ता युवक के घर पर पहुंचे थे।
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कुर्सी पर ही सोते थे अनूप
सील की टीम जब अनूप नायर के घर पहुंची तो  पूरा घर अस्त व्यस्त था। अनूप नायर के बाल बहुत बडे़ और उलझे थे। साथ ही इंफेक्शन के चलते उनके पैर की त्वचा काली पड़ गई थी। वह एक कुर्सी पर सोता था। उनका बेड इतना टूट गया था कि उसकी मरम्मत भी नहीं कराई जा सकती थी। टीम ने अनूप नायर को घर से निकाला और पनवेल स्थित आश्रम में लेकर गई। जहां उसके पैरों के संक्रमण का इलाज किया गया। नायर की मां भारतीय वायु सेना की दूरसंचार शाखा में काम करती थीं और उनके पिता मुंबई के टाटा अस्पताल में कार्यरत थे।



 
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