महाराष्ट्र की भाजपा सरकार सूबे में हाईस्कूल के छात्रों को बोफोर्स घोटाला और आपातकाल का पाठ पढ़ाना चाहती है, जिसको लेकर बवाल शुरू हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि पाठ्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को बदनाम करने की कोशिश की गई है।
वहीं, राज्य के शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली समिति के कामकाज में दखल देने से साफ इनकार कर विपक्ष के विरोध को खारिज कर दिया है। दरअसल, महाराष्ट्र पाठ्यपुस्तक निर्मित और पाठ्यक्रम अनुसंधान बोर्ड की ओर से तैयार 9वीं कक्षा के इतिहास की पुस्तक में आपातकाल को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और बोफोर्स घोटाले को लेकर राजीव गांधी पर टिप्पणी की गई है।
कांग्रेस के नेताओं ने किताब में विवादित तथ्य छापे जाने को लेकर कड़ा विरोध शुरू किया है। बुधवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि छात्रों को इस तरह का पाठ पढ़ाने के पीछे कांग्रेस के दोनों नेताओं को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि किताब में राजीव गांधी के बोफोर्स घोटाले से जुड़े तथ्यों का जिक्र किया गया है जबकि देश की किसी भी अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है।
इसको लेकर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया। विपक्ष ने कहा कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का इस देश के प्रति बड़ा योगदान है। इंदिरा गांधी ने पहली बार परमाणु बम परीक्षण किया और पाकिस्तान को दो टुकड़े कर बंगलादेश मुक्ति संग्राम का नेतृत्व किया।
इस लड़ाई में जीत के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था। भाजपा सरकार छात्रों को बोफोर्स घोटाले का पाठ पढ़ा रही है लेकिन, डिजिटल इंडिया, 3जी व 4जी फोन की बातें करने वाले राजीव गांधी को भूल गए। वहीं, विधान परिषद में कांग्रेस विधायक संजय दत्त ने इस मामले में सरकार की खिंचाई की। उन्होंने मांग की कि पाठ्य पुस्तक के विवादित तथ्यों को हटाया जाना चाहिए।
शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि किताब में राजनीतिक उद्देश्य से कुछ भी नहीं प्रकाशित किया गया है। किताब का पाठ्यक्रम समिति तय करती है। उस समिति में मंत्री के रूप में मेरी कोई भूमिका नहीं है। तावड़े ने कहा कि छात्रों को पहले का इतिहास पढ़ाया जाता था। लेकिन, अब आजादी के बाद का इतिहास पढ़ाया जा रहा है। बोफोर्स घोटाले में राजीव गांधी को 2004 में क्लीन चिट मिली है जबकि किताब में साल 2000 तक का इतिहास पढ़ाया जा रहा है।