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महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर हुआ। अजित पवार सहित एनसीपी के नौ विधायक एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हो गए। अब इस गठबंधन को महायुति नाम दिया है जिसमें भाजपा, शिवसेना और एनसीपी (अजित गुट) शामिल हैं। इसके बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि ये नेता ईडी-सीबीआई के मामलों की वजह से भाजपा के साथ आए हैं।
एनडीए में शामिल एनसीपी के इन नेताओं में कई ऐसे हैं जो खुद या उनके परिजन के खिलाफ अलग-अलग मामले चल रहे हैं। आइए जानते हैं किन नेताओं या उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमे हैं? ये मामले कौन-कौन से हैं? उन पर आरोप क्या लगे? इनमें अब तक क्या हुआ?
Ajit Pawar
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अजित पवार
अजित पवार महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक द्वारा दिए गए ऋणों में अनियमितताओं के आरोपों पर आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच का सामना कर रहे थे। इसके आधार पर, ईडी ने भी इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज किया। सितंबर 2020 में, ईओडब्ल्यू ने कहा कि उसे किसी भी आपराधिक गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला और विशेष अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की।
ईडी ने 2020 में ईओडब्ल्यू के रुख का विरोध किया था लेकिन विशेष अदालत ने उसके हस्तक्षेप को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर ईओडब्ल्यू केस बंद हो जाता तो ईडी भी जांच जारी नहीं रख सकती। इससे पहले कि विशेष अदालत ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला कर पाती, जून 2022 में राज्य में एनडीए की सरकार आ गई। इसके साथ, ईओडब्ल्यू ने भी अक्तूबर 2022 में अपना रुख बदल दिया और कहा कि वह अपनी क्लोजर रिपोर्ट को अलग रखते हुए जांच जारी रखना चाहता है। फिलहाल, ईओडब्ल्यू की जांच जारी है और राज्य की एजेंसी ने अभी तक आरोप पत्र दाखिल नहीं किया है।
इस बीच, ईडी ने अप्रैल में अपनी जांच में आरोप पत्र दायर किया। बैंक में और बैंक से ऋण लेने वाली चीनी सहकारी समितियों को खरीदने वाली कुछ कंपनियों में अजित की भूमिका का ईडी के आरोप पत्र में उल्लेख किया गया था, लेकिन अजित को मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। अजित ने एक बयान में कहा था कि जांच अभी भी जारी है और उन्हें क्लीन चिट नहीं दी गई है।
सिंचाई घोटाला में भी अजित के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। दरअसल, जब अजित पवार कांग्रेस-एनसीपी सरकार में जल संसाधन मंत्री और विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष थे, तब सिंचाई परियोजनाओं में अनियमितता के आरोप लगे थे। जनहित याचिकाओं के आधार पर, महाराष्ट्र एसीबी ने इस संबंध में अदालत की निगरानी में जांच शुरू की। हालांकि, 2019 में फडणवीस के साथ सरकार बनाने के एक दिन बाद, एसीबी ने उन्हें क्लीन चिट देते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालांकि, रिपोर्ट को अभी भी अदालत द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है।
हसन मुश्रीफ
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हसन मुश्रीफ
हसन मुश्रीफ सर सेनापति संताजी घोरपड़े शुगर फैक्ट्री लिमिटेड और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों के कामकाज में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में मुंबई में ईडी की तलाशी का सामना कर रहे। मुंबई की विशेष अदालत और बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष अपनी दलीलों में मुश्रीफ ने कहा था कि उनके खिलाफ मामला एक प्रेरित साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें ईडी मामलों में शामिल करने का जानबूझकर प्रयास किया गया।
मुश्रीफ की अग्रिम जमानत याचिका अप्रैल में विशेष अदालत ने खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पिछले हफ्ते अदालत ने उनकी अंतरिम राहत 11 जुलाई तक बढ़ा दी। इसके साथ उनके तीन बेटों की जांच भी ईडी कर रही है। उनके बेटों की अग्रिम जमानत याचिकाएं विशेष अदालत में लंबित हैं।
छगन भुजबल
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मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दो साल जेल में रह चुके छगन भुजबल
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा भुजबल और 16 अन्य के खिलाफ 2006 में तीन परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के ठेके देने में कथित अनियमितताओं के आरोप में 2015 में मामला दर्ज किया गया था। भुजबल तब राज्य के PWD मंत्री थे। ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए एक अलग मामला भी दर्ज किया गया था। एजेंसी ने मामले में भुजबल को गिरफ्तार किया और दो साल जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत दे दी गई।
सितंबर 2021 में एक विशेष अदालत ने भुजबल और अन्य को बरी कर दिया। भुजबल के खिलाफ ईडी मामले के अलावा मुंबई विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार मामले के संबंध में एसीबी द्वारा दायर एक मामला एक विशेष अदालत के समक्ष लंबित है।
सुनील तटकरे
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अदिति तटकरे के पिता सुनील तटकरे
महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों में अदिति तटकरे शामिल हैं। सिंचाई घोटाले में अजित पवार के अलावा अदिति के पिता सुनील तटकरे की भी एसीबी जांच कर रही है। 2017 में एसीबी द्वारा दायर आरोपपत्र में, उसने तटकरे के नाम का उल्लेख किया था। हालांकि उस समय आरोपी के रूप में उनका नाम नहीं आया। अधिकारियों ने कहा था कि बाद में अलग से आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। ईडी ने इसी मामले के सिलसिले में 2012 में तटकरे के खिलाफ प्रारंभिक जांच भी शुरू की थी। सुनील तटकरे को अजित पवार गुट महाराष्ट्र एनसीपी का अध्यक्ष बना दिया है।
प्रफुल्ल पटेल (फाइल फोटो)
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ईडी की जांच का सामना कर चुके प्रफुल्ल पटेल
ईडी ने 2019 में आरोप लगाया था कि प्रफुल्ल पटेल से जुड़ी एक कंपनी ने 2006-07 में वर्ली में सीजे हाउस बनाया था और इसकी दो मंजिलें 2007 में दाऊद इब्राहिम के सहयोगी इकबाल मेमन उर्फ मिर्ची की पत्नी को हस्तांतरित कर दी गई थीं। मिर्ची के परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ दायर मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में पटेल को 2019-2021 के बीच तलब किया गया। जुलाई 2022 में ईडी ने सीजे हाउस की चार मंजिलें कुर्क कर ली गईं। एनसीपी नेता ने मिर्ची के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया था। ईडी द्वारा दायर आरोपपत्र में प्रफुल्ल को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है।