महाराष्ट्र में आगामी ग्रामीण और शहरी निकाय चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को लेकर मचे सियासी विवाद के बीच राज्य चुनाव आयोग ने बड़ा बयान दिया है। आयोग ने शनिवार को स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को मतदाता सूची में कोई छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। मतदाता सूची में सुधार और अद्यतन पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से किए जा रहे हैं।
यह बयान तब आया है जब विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट), कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। इन दलों का कहना है कि एक ही व्यक्ति के नाम अलग-अलग क्षेत्रों और पते पर दोहराए गए हैं। विपक्ष ने मांग की है कि इन "अनियमितताओं" को तुरंत सुधारा जाए ताकि जनवरी 2026 तक होने वाले निकाय चुनाव निष्पक्ष हो सकें।
आयोग की सफाई
राज्य चुनाव आयोग ने अपने प्रेस बयान में कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अद्यतन मतदाता सूची विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची (एक जुलाई 2025 तक) के आधार पर तैयार की गई है। इन्हें वार्ड स्तर पर विभाजित कर सार्वजनिक किया गया है ताकि नागरिकों को दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। नागरिक ऑफलाइन फॉर्म या ऑनलाइन वोटर्स सर्विस पोर्टल के जरिए अपने विवरण में सुधार कर सकते हैं।
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विपक्ष की शिकायत और बैठकें
14 अक्तूबर को विपक्षी दलों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे और मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात कर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की थी। इस पर आयोग ने बताया कि कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार पाए गए थे, जिन्हें अब ठीक कर दिया गया है। इसी तरह कुछ मतदाताओं की उम्र गलत दर्ज थी, जो अब सही कर दी गई है।
आयोग की पारदर्शिता पर जोर
आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में दर्ज सभी जानकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और किसी भी राजनीतिक दल को इसमें बदलाव करने की अनुमति नहीं है। झुग्गी बस्तियों या बिना नंबर वाले मकानों के कारण जिन मतदाताओं के पते अधूरे थे, उन्हें भी सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अपडेट किया जा रहा है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे बूथ स्तर पर अपने एजेंट नियुक्त करें ताकि मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
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सुधार की प्रक्रिया और आयोग की कार्रवाई
राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि 2002 से अब तक विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों का वार्षिक विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है। इन सूचियों के प्रारूप और अंतिम संस्करण सभी मान्यता प्राप्त दलों को दावे और आपत्तियों के लिए उपलब्ध कराए जाते हैं। 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले भी ऐसा किया गया था। अक्तूबर 2024 के बाद भले ही कोई औपचारिक सारांश संशोधन नहीं हुआ, लेकिन नवंबर 2024 से सितंबर 2025 तक की मासिक अपडेट वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं। आयोग ने कहा कि वह पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।