महाराष्ट्र की राजनीति ने शनिवार सुबह जो पलटी मारी, उससे राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि देश का आम जन भी हतप्रभ रह गया। पिछले कई दिनों से शांत और चुप दिखाई देने वाली भाजपा अंदर ही अंदर ही सत्ता तक पहुंचने का तानाबाना बुन रही थी, किसी को भी इसकी भनक नहीं लग सकी। खैर, अब महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार बन गई है, लेकिन अगला सप्ताह पार्टी के लिए अहम रहेगा।
पार्टी को विधानसभा के पटल पर बहुमत साबित करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब शांत बैठने वाली नहीं है। सारी ताकत लगाकर महाराष्ट्र की सरकार को बचाया जाएगा। इस स्थिति में यह हैरानी वाली बात नहीं होगी कि आने वाले दिनों में शिवसेना और कांग्रेसी विधायकों में भी टूट हो जाए। इन दोनों पार्टियों में सेंध लगने का खतरा बना रहेगा।
सूत्रों का यह भी कहना है कि कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को टूट से बचाने के लिए उन्हें मध्यप्रदेश और राजस्थान भेजने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी का कहना है कि महाराष्ट्र में 288 विधायकों वाले सदन में भारतीय जनता पार्टी के पास अपने 105 विधायक हैं। सरकार नियमित तौर पर चलती रहे, इसके लिए उसे 145 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा दावा कर रही है कि उसके पास पर्याप्त बहुमत है।
एनसीपी के 54 विधायकों में से अधिकांश का समर्थन मिलने की बात भी भाजपा कर रही है। यदि एनसीपी के 10-12 विधायकों को निकाल दें तो भी भाजपा बहुमत जुटा सकती है। भाजपा को अजीत पवार के 35 और करीब 13 निर्दलीय विधायकों का साथ मिल जाए तो सरकार को कोई खतरा नहीं रहेगा। चूंकि यह क्लोज मामला बन जाता है, इसलिए भाजपा शांत बैठने वाली नहीं है। वह सारी ताकत लगाकर फडणवीस सरकार को आगे ले जाएगी।
महाराष्ट्र की इन तीन पार्टियों में बना हुआ है टूट का खतरा
नीरजा के मुताबिक, आने वाला सप्ताह बहुत अहम है। शिवसेना और कांग्रेस में टूट हो सकती है। ये भी संभावना है कि एनसीपी के बाकी बचे विधायक भी अजीत पवार के साथ आ जाएं। कोई भी विधायक दोबारा चुनाव मैदान में नहीं उतरना चाहता। एनसीपी, कांग्रेस, शिवसेना या भाजपा, चाहे किसी भी पार्टी को लें, उसके विधायकों ने काफी कुछ दाव पर लगाकर चुनाव जीता है।
अब यह बात साफ हो गई है कि भाजपा अंदरखाते अनेक विधायकों के संपर्क में रही है। जब एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना जैसे दल, सरकार का गठन करने के लिए बैठकें कर रहे थे, तब अंदर ही अंदर भाजपा चुपके से एक नई रणनीति बना रही थी। इसका आभास किसी को नहीं हुआ। अजीत पवार रातों रात भाजपा के पाले में नहीं आए हैं। इसके लिए कई दिनों से होमवर्क किया जा रहा था।
भाजपा ने जब सरकार बनाई है तो वह बहुमत हासिल करने का भी दम रखती है। यह अलग बात है कि भाजपा की चुप्पी उसकी रणनीति का हिस्सा थी। अब सबसे बडी चिंता शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के लिए है। इन पार्टियों में टूट का खतरा बरकरार है।
इस मामले में कांग्रेस और एनसीपी जैसी पार्टियां महाराष्ट्र में टूट का सॉफ्ट टारगेट बन सकती हैं। शिवसेना के कई विधायक भी भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों को राजस्थान और मध्यप्रदेश भेजने की तैयारी कर रही है।