महाविकास अघाड़ी को लेकर दिए गए शरद पवार के बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रतिक्रिया दी है। सीएम शिंदे का कहना है कि शरद पवार जो कहते हैं, उसमें गंभीरता होती है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने रविवार को कहा था कि राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनाव होने वाले हैं, कल महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी रहेगी या नहीं, यह नहीं पता।
शरद पवार के इसी बयान पर सोमवार को सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि आदरणीय शरद पवार साहब बड़े अनुभवी नेता हैं। महाविकास अघाड़ी लेकर दिया गया उनका वक्तव्य बड़ा महत्वपूर्ण है। वह हमेशा जो कहते हैं, उसमें गंभीरता होती है। मैं इतना ही कहूंगा, जिसका जो सोचना है, वह सोच लें।
पढ़िए…शरद पवार ने क्या कहा था
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने रविवार को अमरावती में कहा था कि आज हम अघाड़ी का हिस्सा हैं। हमारी इच्छा है कि हम साथ में काम करें, पर इच्छा से क्या होता है। उन्होंने आगे कहा कि आगे विधानसभा और लोकसभा चुनाव होने वाले हैं। आगे अघाड़ी रहेगी या नहीं, इस पर चर्चा नहीं हुई है। क्या महा विकास अघाड़ी गंठबंधन एक साथ चुनाव लड़ेंगे के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि सीटों के बंटवारे से लेकर कई मुद्दे होते हैं। जिन पर अभी चर्चा नहीं हुई है। पार्टियों के अपने-अपने विषय हैं। ऐसे में अभी कैसे कह सकते हैं कि एमवीए पार्टियां 2024 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ेंगी या नहीं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी की टिप्पणी
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने शरद पवार के बयान पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि महाविकास अघाड़ी को लेकर जनता के साथ ही उनके नेताओं को भी भ्रम है कि यह गठबंधन कहां तक जाएगा। बावनकुले ने कहा कि शरद पवार ने जो कुछ कहा है वह उनकी निजी राय है। पवार साहब को जल्द ही पता चल जाएगा कि उनको उनके ही लोगों ने छोड़ दिया है।
क्या है महाविकास अघाड़ी
महाविकास अघाड़ी, एमवीए के नाम से भी प्रसिद्ध है। 2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना (उद्धव गुट) के उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने राज्य स्तरीय गठबंधन बनाया था। महाविकास अघाड़ी में एनसीपी, शिवसेना (उद्धव गुट), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, पीडब्ल्यूपीआई , सीपीआई (एम) और निर्दलीय विधायकों सहित कई अन्य राजनीतिक दल शामिल हैं। उद्धव ठाकरे को 26 नवंबर 2019 को हुई बैठक में गठबंधन के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। इसके बाद 28 नवंबर को उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।