महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग की एक जिला अदालत ने बुधवार को भाजपा विधायक नितेश राणे को हत्या की कथित कोशिश के मामले में जमानत दे दी। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के बेटे नीतीश ने 2 फरवरी को अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरबी रोटे ने जमानत को मंजूरी दी।
दरअसल, राणे पर पिछले साल सिंधुदुर्ग जिला सहकारिता बैंक के चुनाव के लिए अभियान के दौरान शिवसेना कार्यकर्ता संतोष परब पर हमले का आरोप है। हालांकि विधायक ने कई मौकों पर दावा किया कि आदित्य ठाकरे की चुटकी लेेने की वजह से उन्हें शिवसेना नेतृत्व वाली एवीए सरकार निशाना बना रही है।
इससे पहले सिंधुदुर्ग जिले की सत्र अदालत ने पिछले हफ्ते कंकावली से विधायक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद वे जमानत के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि, यहां भी उन्हें निराशा मिली थी। विधायक ने अपनी याचिका में दावा किया था कि राजनीतिक रंजिश के चलते उन्हें हत्या के प्रयास के मामले में झूठा फंसाया गया है।
क्या है नीतेश राणे पर दर्ज मामला?
भाजपा विधायक का दावा है कि यह मामला उनके खिलाफ इसलिए दर्ज किया गया था, ताकि वे 30 दिसंबर को सिंधुदुर्ग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक चुनावों में हिस्सा न ले सकें। नीतेश राणे और अन्य के खिलाफ पिछले दिसंबर में कंकावली पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 120 (बी) (आपराधिक साजिश) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह मामला बैंक चुनाव के प्रचार के दौरान स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ता संतोष परब पर कथित हमले से जुड़ा है। हालांकि, शिवसेना को झटका देते हुए नारायण राणे के नेतृत्व वाले पैनल ने सिंधुदुर्ग जिला केंद्रीय सहकारी बैंक चुनाव जीता है। नीतेश की याचिका में दावा किया गया था कि उन्हें फंसाया जा रहा है और यह उनके तथा उनके पिता के खिलाफ यह मामला ‘‘सत्तारूढ़ व्यवस्था के इशारे पर राजनीतिक प्रतिशोध या प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित’’ है।
देशमुख मामले की अगली सुनवाई 14 को
वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। यह जवाब देशमुख की जमानत याचिका पर मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में सुनवाई चल के दौरान दाखिल किया गया। अगली सुनवाई 14 फरवरी को होगी। अधिवक्ता अनिकेत निकम ने यह जानकारी दी।