भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में आधा दर्जन दिग्गज नेताओं के पत्ते काट कर साफ कर दिया कि वह कामकाज में ढिलाई और भ्रष्टाचार के आरोपों को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। फडणवीस मंत्रिमंडल में शामिल एकमात्र चंद्रकांत पाटिल को छोड़कर सभी बड़े नेताओं के टिकट काट दिए गए।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने टिकट देते वक्त मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड की सख्ती से जांच की। पांच बार विधायक रहे खडसे 2016 में ही भ्रष्टाचार के आरोपों से बुरी तरह घिरे और पार्टी में साख खोते चले गए थे। मेहता को झुग्गी पुनर्वास परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप में इसी साल कैबिनेट से हटाया गया था। बावनकुले पर भी झूठे कागजात के आधार पर अपने परिजनों को सरकारी नौकरियां दिलाने से लेकर भाई को सड़क निर्माण के करोड़ों का ठेका दिलाने के आरोप लगे।
इससे केंद्रीय नेतृत्व नाराज था। इन नेताओं के बीच तावड़े और पुरोहित को टिकट न मिलने के पीछे कामकाज की शिकायतों के साथ मुख्य रूप से सीनियर नेताओं की नाराजगी बताई जा रही है। तावड़े को फडणवीस खास पसंद नहीं करते और कहा जाता है कि उनके शिक्षा मंत्री वाले कार्यकाल में कुछ शिकायतें मुख्यमंत्री के पास आई थीं।