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निशाने पर एमवीए सरकार: कैग की रिपोर्ट में बीएमसी में भ्रष्टाचार का दावा, सीएम शिंदे ने दिए जांच के आदेश

Sat, 25 Mar 2023 05:21 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

राज्य के डिप्टी सीएम द्वारा सदन में पेश की गई कैग रिपोर्ट में 28 नवंबर, 2019  से 31 अक्टूबर, 2022 के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम के नौ विभागों द्वारा किए गए 12,023.88 करोड़ रुपये के खर्च की जांच के बारे में बताया गया है।  
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बीएमसी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मुंबई नगर निकाय के कामकाज पर भारत के भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट शनिवार को महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई। राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस रिपोर्ट को सदन में पेश करते हुए पूर्व की एमवीए सरकार पर निशाना साधा। इस रिपोर्ट में 28 नवंबर 2019 से 28 फरवरी 2022 के दौरान  मुंबई नगर निकाय द्वारा किए गए कामों में पारदर्शिता और योजना की कमी के साथ-साथ धन के लापरवाही से इस्तेमाल के बारे में बताया गया है। साथ ही इसमें उस काल में कोविड-19 प्रबंधन व्यय रिकॉर्ड का ऑडिट नहीं कर सकने का भी उल्लेख किया गया है। 

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12000 करोड़ रुपये से ज्यादा के खर्च की हुई जांच
राज्य के डिप्टी सीएम द्वारा सदन में पेश की गई कैग रिपोर्ट में 28 नवंबर, 2019  से 31 अक्टूबर, 2022 के बीच बृहन्मुंबई नगर निगम के नौ विभागों द्वारा किए गए 12,023.88 करोड़ रुपये के खर्च की जांच के बारे में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस काल में प्रभावशाली पम्पिंग स्टेशन के एक मामले सहित बिना निविदा जारी किए कई ठेके जारी किए गए थे। 

बिना निविदा आमंत्रित किए दे दिया गया टेंडर
रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट के दौरान सामने आया है कि बीएमसी ने दो विभागों में 214.48 करोड़ रुपये के 20 कामों के लिए बिना निविदाएं आमंत्रित किए टेंडर जारी किया। यह नागरिक निकाय के मैनुअल के साथ-साथ स्थापित सतर्कता दिशानिर्देशों के खिलाफ था। साथ ही पांच विभागों में  4,755.94 करोड़ रुपये की लागत के 64 कामों में ठेकेदारों और बीएमसी के बीच कोई औपचारिक अनुबंध नहीं किया गया था। कानूनी अनुबंध के अभाव में बीएमसी इन ठेकेदारों के खिलाफ चूक की स्थिति में कोई कानूनी सहारा नहीं ले पाएगा। 
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इसके अलावा, तीन विभागों में 3,355.57 करोड़ रुपये की लागत वाले 13 कार्यों में ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों की गुणवत्ता और मात्रा का पता लगाने के लिए तीसरे पक्ष के लेखा परीक्षकों को नियुक्त नहीं किया गया था। 

कोरोना से जुड़े कामों का नहीं हो सका ऑडिट
गौरतलब है कि कैग ने जिन 12,023.88 करोड़ रुपये के कामों की जांच की उसमें से 3500 करोड़ रुपये के कार्य कोरोना से संबंधित थे। इसके कारण महामारी रोग अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कैग इन कामों के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट नहीं कर सका। रिपोर्ट के मुताबिक, महालेखाकार (ऑडिट)-I महाराष्ट्र के कार्यालय द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद COVID-19 महामारी के प्रबंधन के लिए खर्च से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किए गए थे। बीएमसी ने महामारी अधिनियम का हवाला देते हुए 3538.73 करोड़ रुपये के धन के खर्च की जांच की अनुमति नहीं दी।

फडणवीस ने साधा निशाना
रिपोर्ट पेश करते हुए फडणवीस ने सदन में बिना नाम लिए पूर्व की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जांच केवल 12,000 करोड़ रुपये तक ही सीमित थी। अगर नगर निकाय के पूरे कामकाज की जांच की जाती तो अधिक अनियमितताएं सामने आतीं।

अगर मिला भ्रष्टाचार का उदाहरण तो होगी कार्रवाई
 वहीं, इस दौरान भाजपा विधायक अमित साटम ने मामले को महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपने और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। इस पर फडणवीस ने कहा कि विशेष ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा की लोक लेखा समिति (पीएसी) को सौंपी जाएगी। जिसके बाद अगर भ्रष्टाचार का कोई उदाहरण पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने राज्य विधानसभा में भाजपा विधायक अमित साटम द्वारा बृहन्मुंबई नगर निगम से जुड़ी कुछ कंपनियों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की घोषणा की। 

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