तटकरे और मुंडे ने भी दिया था अजित जैसा सुझाव
अजित के सुझाव को बेशक उस समय शरद पवार और कई वरिष्ठ नेताओं ने खारिज कर दिया लेकिन खतरे को भांप नहीं पाए। इसके एक हफ्ते बाद मुंबई में अजित ने बगावत करके पवार और अपनी पार्टी को आश्चर्यचकित कर दिया। पुणे की बैठक में एनसीपी नेतृत्व न केवल अजित के मन में चल रही बातों को समझने में नाकाम रही बल्कि बाद के संकेतों को भी नहीं पढ़ पाई। सूत्रों का कहना है कि शरद पवार के आवास पर हुई छोटी बैठकों में धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने अजित जैसी राय रखी।
दो हफ्ते से बात कर रहे थे फडणवीस और अजित
सूत्रों का कहना है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के बीच पहली बार बात 10 नवंबर को हुई थी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच लगभग रोजाना बातें होती रहीं। कई बार तो एक दिन में दोनों कई बार बात किया करते थे। दोनों नेता अच्छी तरह से जानते थे कि यदि उनके बीच हो रही बातचीत की किसी को भनक लगी तो पूरी योजना चौपट हो जाएगी। फडणवीस और अजित के बीच कुछ चल रहा है जानकारी केवल धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे को थी। तटकरे अजित पवार के करीबी माने जाते हैं। वहीं मुंडे को इसलिए चुनाव इसलिए हुआ क्योंकि फडणवीस को उनपर भरोसा है।